मोटिवेशन नहीं स्पष्टता चाहिए || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2022)

प्रश्नकर्ता: मेरा जो प्रश्न है वो ये है कि मेरा मोटिवेशन लेवल (प्रेरणा स्तर) बहुत फ्लकचुएट (उतार-चढ़ाव) होता है, दिन में ही कई बार बहुत गहरे में भी चला जाता है। ऐसा लगता है कि मुझे किसी साइकेट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) या डॉक्टर (चिकित्सक) की हेल्प (मदद) लेनी चाहिए।
आपको जब सुनता हूँ तो मोटिवेशन लेवल अच्छा हो जाता है। एक-दो घंटे रहता है, फिर वही स्थिति बन जाती है।
कोई-न-कोई मैं विषय चुन लेता हूँ और डिमोटिवेट हो जाता हूँ। फिर मैं कुछ सुनता हूँ यूट्यूब पर या आपकी बुक्स पढ़ता हूँ तो मैं अपना मोटिवेशन लेवल वापिस सामान्य कर पाता हूँ।
लेकिन मैं चेतना का तल उतना नहीं बढ़ा पा रहा हूँ कि साहस हर समय बना रहे। तो ज़रा मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: आपने उसमें कितना समय और कितनी ऊर्जा लगा ली कि चेतना का तल उठ जाए? इतना सस्ता है काम, मैं जो बातें आपसे बोलता हूँ वो बातें बोलने के लिए मैंने अपनी पूरी ज़िन्दगी लगायी है। आपने कितने दिन, हफ़्ते या महीने या साल लगाये हैं?
प्र: आपको मैंने पिछले साल अक्टूबर से सुनना शुरू किया है और उससे पहले मैं ओशो को काफ़ी सुनता था।






