जो जगेगा, वही रोएगा क्योंकि संसार बड़ी पीड़ा में है। और जो जगता है, संसार की पीड़ा अपने ऊपर ले लेता है। संतों का रोना संत की करुणा की अभिव्यक्ति है। वो तुम्हारे लिए रोते हैं, वो अपने लिए नहीं रोते। दस लोग सो रहे हैं और घर में आग लग गई है। उन दस में से एक जगा हुआ है, तनाव किसे रहेगा? एक जगे हुए आदमी को ना! जो जग जाता है, वह शिव की तरह संसार के विष को ग्रहण करता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
सुखिया सब संसार है, खावे और सोए।
दुखिया दास कबीर है, जागे और रोए।।
~ संत कबीर साहब
आचार्य प्रशांत: सवाल है कि क्या कबीर साहब को भी दुख होता है, क्या वे भी रोते हैं? और अगर जग ही चुके हैं तो अब दुख काहे का है?
कौन हैं कबीर साहब? ठीक कहा तुमने। कबीर साहब वो हैं जो जग चुके हैं, वो जीवन मुक्त हैं, संसार सो रहा है।
सुखिया सब संसार है, खावे और सोए।


![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)

