जीवन सही जियो, तो रिश्ते भी फिर सही बनाओगी। सही लोगों को ही अपनी ज़िंदगी में प्रवेश दोगी। गलत ज़िंदगी जीने के कई दुष्परिणाम होते हैं। उनमें से एक ये होता है कि तुम्हें सब गलत ही लोग मिलेंगे। अभी दिक़्क़त ये होती है कि खेल तो होता है सारा जिस्मानी, लेकिन तुमने अपने आप को ये समझा रखा होता है कि बात भावनाओं की है। तो फिर जब रिश्ता टूटता है जिस्मानी, तो तुमको ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी भावनाओं पर चोट हुई है। अरे, बात भावनाओं की कभी थी ही नहीं। क्यों व्यर्थ में भावनाओं को इसमें बीच में ला रहे हो।
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प्रश्नकर्ता: सर, मुझे पूछना है कि मेरा एक साल का रिलेशन था, फिर मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे छोड़ दिया। मैं अपने एक्स को भूल नहीं पा रही हूँ। क्या वो भी मुझे उतना ही याद करता होगा जितना मैं उसे करती हूँ।
आचार्य प्रशांत: बेटा, कहाँ से शुरू करूँ? तुम्हारी उम्र के लड़के-लड़कियों में चलता है कि अगर आप किसी को याद कर रहे हैं, तो वही इस बात का सबूत है कि वो भी आपको याद कर रहा होगा। और भी चलता है कि अगर आपको हिचकी आ रही है, तो माने वो याद कर रहा है। और भी चीज़ें आती हैं शरीर में, वो आती होंगी तो वो और कुछ कर रहा होगा आपकी याद में। हिचकी तो बड़ी सभ्य-सुसंस्कृत चीज़ हो गई।
अब पता नहीं उम्र कितनी है तुम्हारी, इसमें तुमने कुछ लिख के भेजा नहीं है। पर जो बात लिखी है, उससे लगता है कि छात्रा हो या अधिक से अधिक हालिया स्नातक वग़ैरह हो, 20 के आसपास; 20 की उम्र है, तो फिर तो पढ़ ही रही होगी। बेटा, पढ़ लो। वो कितनी उम्र का जो छोड़ गया तुमको, वो भी ऐसे ही होगा।




