पर तुमने अगर मेरे साथ थोड़ा सुना है, पढ़ा है, अध्यात्म, उपनिषद्, गीता थोड़ा तुम्हारे भीतर उतरी है, तो मनुष्य क्या है? मनुष्य की पहचान क्या है? त्रिगुणात्मक प्रकृति क्या है? और किस तरीक़े से वो हमें संचालित करती है, ये सब समझ में आया होगा। तो फिर समझ पाओगे कि मैं तुम्हें क्या कह रहा हूँ। कुछ विशेष नहीं है बेटा यहाँ पर। क्या विशेष हो जाना है, बताओ न क्या विशेष हो जाना है?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: मेरा ब्रेकअप हुआ है और मेरी प्रेमिका ने तो दो-तीन महीने में एक दूसरा पकड़ लिया है। अब मुझे ख़्याल आते हैं कि वो और वो जो दूसरा वाला है, उनका क्या चल रहा होगा? और ये ख़्याल, ये कल्पनाएँ अब मुझे जीने नहीं दे रही हैं। मैं क्या करूँ?
आचार्य प्रशांत: सचमुच दुनिया में बहुत ग़म है। तुम एक काम करो, बिल्कुल मज़ाक में नहीं बोल रहा हूँ। ठीक है? ये तुम्हें मैं रामबाण इलाज बता रहा हूँ।
जितनी तुम कल्पनाएँ करना चाहते हो, सब कर डालो एक बार में बैठकर, और सहज हो जाओ। तुम क्या कल्पना की बात कर रहे हो? तुम्हें और कुछ नहीं कल्पना आ रही है, यही आ रही है कि सेक्स कर रही होगी उसके साथ। क्योंकि तुमने भी लड़की पकड़ी तो सेक्स के लिए ही थी। अब तुमने किया कि नहीं किया, पता नहीं, पर दूसरे के साथ कर रही है, ऐसा तुम्हें ख़्याल आ रहा होगा, यही तुम्हारे दिमाग़ में ब्लू फ़िल्म चल रही होगी। उससे तुम परेशान हो रहे हो, इतनी सी बात है।
तो तुम वो पूरी चला डालो और उसको रिवाइंड कर-करके पाँच-सात बार, एक ही रात में ख़त्म कर दो। काहे के लिए उसको थोड़ा-थोड़ा अपने आप को कचोटने दे रहे हो। जो भी ज़हर है, पूरा ही पी लो। उसमें ऐसा कुछ है नहीं, थोड़ी देर बाद अपनी कल्पनाओं में पाओगे कि दो जिस्म बचे हैं बस उनके चेहरे नहीं हैं। क्योंकि जिस्म जब दो होते हैं न तो चेहरे तो उनके होते भी नहीं। चेहरे का मतलब होता है,




