काम पैसा कमाने का ज़रिया नहीं होता, काम ज़िंदगी ही होता है। पैसे के लिए काम करके ज़िंदगी बर्बाद मत करना। काम ऐसा हो कि दिल लग जाए — असली प्रेम प्रसंग यही है। अगर तुम्हारे काम से सिर्फ़ पैसा मिल रहा है, तो वह तुम्हारा शोषण कर रहा है। ऐसा काम करो, जो तुम्हारी कमज़ोरियों को चुनौती दे और जिसकी दुनिया को ज़रूरत हो। जहाँ ये दोनों ज़रूरतें पूरी हों, समझ लो, वही तुम्हारे लिए सबसे अच्छा काम है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मैं आपको दस महीने से सुन रहा हूँ लगभग और मैं इक्कीस साल का हूँ। तो अभी फ़िलहाल दो महीने पहले मेरी जॉब(नौकरी) लगी है। तो प्रॉब्लम (समस्या) यह है कि मुझसे जब भी कोई पूछता है, तुझे आगे क्या करना है; घर से भी पूछते हैं बार-बार, डेली कॉल्स आती हैं कि तू अब क्या करेगा, आगे क्या करेगा। अभी क्योंकि सैलरी (वेतन) इतनी नहीं है कि, वो चाहते हैं कि और बढ़े सैलरी। तो और ऑफिस (कार्यालय) में भी सब मेरे से पूछते हैं कि अच्छा, तेरा आगे का क्या प्लान (योजना) है, दो साल बाद?
तो मैं कहता हूँ पता नहीं और यही सवाल दस महीने पहले कोई मेरे से पूछता तो निर्धारित था कि इस जॉब में जाना है, पर अब कुछ भी पता नहीं है कि क्या करना है, किस डायरेक्शन (दिशा) में जाना है? कोई कहता है, मेरी जो मेरी बहन है, वो मुझे कहती है कि तू इंडिया के बाहर चला जा। मम्मी-पापा कहते हैं कि डेटा के फील्ड मे चला जा, वो बूम (उछाल) है उस फील्ड (क्षेत्र) में क्योंकि और कोई मेरे सामने जा रहा है, कोई रेडियो जॉकी बन रहा है, कोई फिल्म इंडस्ट्री (फ़िल्म उद्योग) में जा रहा है। तो बहुत ज़्यादा रुख़, समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ आगे। कैसे सोचूँ। मतलब डिसीजन




