सर, आपने मौत को करीब से देखा है कभी? || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2021)

प्रश्नकर्ता: वायरस की आपने बात कही तो ये ऑमिक्रॉन (कोरोना वायरस का एक वेरिएंट) और एक के बाद एक आते जा रहे हैं। मैं जानती हूँ आप बहुत बार इस पर भी बात कर चुके हैं, पर यह क्या एक ब्लैक होल है जो खुल चुका है और अब ऑमिक्रॉन फिर पता नहीं क्या-क्या?
आचार्य प्रशांत: अब ये तो वायरोलॉजिस्ट्स (विषाणु विज्ञानी) ही बताऍंगे। ऑमिक्रॉन भी कोई एक चीज़ नहीं है, जितना मैं पढ़ पाया हूँ ये वेरिएंट्स (रूपान्तर) के भी वेरिएंट्स हैं। तो मैं इसके बहुत ब्यौरे में तो नहीं जा पाऊॅंगा, वह काम विशेषज्ञों का है। लेकिन इतना पता है कि हम जिस तरह का रिश्ता रख रहे हैं प्रकृति के साथ तो एक के बाद एक आपदाएँ हम पर आनी ही हैं।
ये काम ऐसा है जिसकी सज़ा तो मिलनी-ही-मिलनी है। हम जंगलों में घुसे जा रहे हैं, हम जीवों की रोज़ करोड़ों-अरबों में हत्या कर रहे हैं। यही नहीं कि सिर्फ़ खाने के लिए, उनका घर नष्ट कर दिया है, उनकी पूरी प्रजातियाँ विलुप्त हुई जा रही हैं। रोज़ दर्जनों प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।
प्र: आप विश्वास नहीं करेंगे, मैं गॉंव गई थी और वहाँ अभी भी लोग शिकार पर जा रहे हैं, युवा लड़के। वो कुछ (तथाकथित) राजा हैं, उनकी राजगद्दी छिन गयी सेवेंटीज़ (सत्तर के दशक) में, पर अपने सबटाइटल्स (उपशीर्षकों) से इतना ज़्यादा सेंस आफ़ बिलॉन्गिंग (तादात्म्य का भाव) है।
आचार्य: इनके सिर पर काल नाच रहा है। ये तो नहीं ही बचेंगे, ये अपने साथ न जाने कितनों को डुबोऍंगे। मुझे भी



