देवी इत्यादि किसी के शरीर में नहीं प्रवेश करती, ये निश्चित रूप से एक मानसिक बात है। और इसीलिए ये चीज़ पाई वहीं पर जाती है ज़्यादा, जहाँ पर इस तरह की भ्रांतियाँ प्रचलित होती हैं। जिसके मन में ये बात पहले से होगी कि देवी इत्यादि प्रवेश करती हैं, वहाँ ये चीज़ खूब होगी। पुराने आदिवासी कबीलों में चले जाओ, वहाँ नियमित रूप से ऐसा होता है कि किसी पर कोई आकर के पुरखा सवार हो गया या किसी पर आकर के कुल देवता सवार हो गया।
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प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर, क्या हमारे शरीर में देवी-देवताओं का प्रवेश संभव है, जैसे अक्सर कहा जाता है कि “शरीर में माता आ गई” और जिनके शरीर में आई, उनके हाव-भाव बदल गए। यह सच्चाई है, कोई मानसिक भ्रम, अंधविश्वास या कुछ और?
आचार्य प्रशांत: देखो, शरीर भौतिक है, तो शरीर में तो भौतिक चीज़ें ही प्रवेश लेंगी न, बहुत सीधा सिद्धांत है। शरीर क्या है? भौतिक, पदार्थ है, मैटेरियल है न शरीर, तो उसमें कैसे कोई चीज़ घुसेगी? तुम्हारे नथनों में हवा घुसती है, हवा क्या है? मॉलीक्यूल होते हैं उसमें वो प्रवेश कर जाते हैं भीतर। तुम्हारे हाथ में रंग लग जाता है या मैल लग जाती है, वो सब चीज़ें भी क्या हैं? वो पदार्थ हैं, रसायन हैं, केमिकल्स हैं, वो तुम्हारे शरीर के साथ जुड़ जाते हैं। हो सकता है तुम्हारी खाल से तुम्हारे भीतर भी आ जाएँ। तुम खाना खाते हो, वो खाना भी पूरा क्या है? वो भी रसायनों का एक समूह ही है।
तो भौतिक शरीर में भौतिक चीज़ें ही तो प्रवेश करेंगी न। तो देवी-देवता अगर तुम कहते हो तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, तो फिर वो भी भौतिक हुए। और अगर वे भौतिक हैं, तो फिर इसी दुनिया में कहीं न कहीं रहते हैं। ये खुशख़बरी जैसी तो लगती है बात, कि इसी दुनिया में कहीं न कहीं हैं, तो कभी मिल जाएँगे क्या पता। लेकिन ये बात फिर उनके स्तर को भी बहुत गिरा देती है। देवी-देवता तो आदर के पात्र हैं न, तुम क्यों उनका स्तर गिराना चाहते हो? क्योंकि जो कुछ भी इस दुनिया का है, वो तो इस दुनिया के दोषों से युक्त होगा न। जो भी इस दुनिया का है, वो तो फिर कभी जन्मेगा, कभी जिएगा, बीमार पड़ेगा, बूढ़ा होगा और मर भी जाएगा।




