किसी व्यक्ति का मूल्य कैसे नापें? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2020)

आचार्य प्रशांत: वो जो है, ठीक है? जो सब उपनिषदों का ध्येय है, प्रतिपाद्य विषय है, वो ऐसा है जैसे दूध में मक्खन और मक्खन का भी शिरोभाग, शिरोबिन्दु। मक्खन के ऊपर रहने वाला सारभाग है वो,ठीक है? छाछ, छाछ पर मक्खन, और मक्खन में भी सबसे ऊपर?
तो पहली बात, वो जगत में ही है। दूसरी बात वो जगत का शीर्ष है। पहली बात, बाहर कहीं नहीं मिलेगा, यहीं मिलेगा। वो जो बिन्दु है, माखन-माखन सन्तों ने खाया, वो भी है तो उसी दूध-छाछ वाले सिस्टम, उसी व्यवस्था के भीतर ही कहीं का। तुम्हें मथनी जैसा होना चाहिए कि तुम दोनों को अलग कर सको। नहीं तो दूध में तो मक्खन छुपा रह जाता है न या हाथ में आ जाता है? कर सकते हो?
तुम्हें कैसा होना है? मथनी जैसा होना है, कि तुम मथ पाओ, तुम अलग कर पाओ। तो वह सूक्ष्म है, सूक्ष्म माने वो सबसे हल्का भी है। सबसे हल्का है, शीर्षस्थ है, और अन्तर्यामी है, बीच में है। ऊपर भी है बीच में। जब ऊपर है तो कह देते हैं, कूटस्थ है, शीर्षस्थ है, कूटस्थ है, अन्तर्यामी है। और इतना ही नहीं है, जगत को सब ओर से घेरकर स्थित है वो। जगत में हैं, माने भीतर है, जगत के ऊपर है। अतिशय सूक्ष्म है और जगत में घेरे हुए भी हैं, चारों ओर से भी है।
ये सारी बातें एक साथ क्यों सही हैं और क्यों कही गई हैं? ये सारी बातें अहंकार के अलग-अलग कुतर्कों को सम्बोधित हैं। ये सारी बातें अहंकार के अलग-अलग कुतर्कों को सम्बोधित हैं। क्योंकि कोई भी बात हमने कहा अपनेआप में तो सही होती नहीं। हर बात किसी एक स्थिति में, किसी एक सम्बोधित इकाई के परिपेक्ष में सही होती है।
तो अहंकार कुतर्क लेकर के आया कि, "दुनिया में साहब सबसे ऊँची चीज़ तो पैसा है।” तो वहाँ पर ऋषि उससे क्या बोलेंगे? नहीं। ये जो पूरा जगत का व्यापार है इसमें जो सबसे ऊपर है देखो वो पैसा नहीं है, वो सत्य हैं। गौर से देखना।



