हमने दुःख आमंत्रित करने की ज़िद पाल ली है || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)

प्रश्न: सर, ऐसा कहा जाता है कि जब तक कोई दर्द न मिला हो, तब तक कुछ और मिलता नहीं।
वक्ता: हाँ, सही कहा है जिसने कहा है कि जब तक दर्द नहीं मिलता तब तक और नहीं मिलता। और क्या नहीं मिलता? चीख़े नहीं मिलती, आँसू नहीं मिलते, कष्ट, पीड़ाएं, दुःख, पस, मवाद, ये सब दर्द के साथी हैं। उसी के साथ आते हैं। जिसने कहा सो कहा, तुमने सुना क्यूँ ये सब। हमसे ज्यादा समझदार तो जानवर हैं, वह भी ये बात नहीं मानेंगे। अस्तित्व में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसने दर्द को पकड़ रखा हो। आदमी ही है बस और फिर तुम गाने बनाते हो, ‘जब दर्द नहीं था सीने में, तब ख़ाक मज़ा था जीने में’। सुना है? वो गा रहा है अपनी दर भरी आवाज़ में और तुम, आह ये महावाक्य। अरे दर्द होना चाहिए, ऐसे लोगों को तो और दर्द देना चाहिए। जब दर्द में ही जीवन का रस है, तो आओ थोड़ा दर्द हमसे भी लो। हम भी तुम्हें रस देने के इच्छुक हैं। फिर जीवन में इतना दर्द हो जाता है कि चेहरे से टपकता है। जहाँ जाते हो, वहाँ पीछे दर्द की धारा बहाते चलते हो। और बहुत दर्द भरी दुनिया हो गयी है हमारी, इसीलिए चारों तरफ देखो दर्द ही दर्द है। कौन- कौन इच्छुक हैं दर्द के लिए? क्या मिलेगा तुम्हें दर्द से? जीवन आनंद है, जीवन मौज है। दर्द तो भूल का परिणाम होता है, दर्द नासमझी का परिणाम है, दर्द धोखे का परिणाम है। दर्द जीवन नहीं है| किसने ये बात तुम्हारे मन में भर दी कि दर्द जीवन है? दर्द तुम्हें मिलता है तुम्हारी चालाकियों से, तुम्हारी कुटिलताओं से। दर्द तुम्हें मिलता है जब तुम सोचते हो कि तुम बहुत ख़ास हो, तुम ये कर लोगे और तुम वो कर लोगे। जीवन की टेढ़ी चाल देती है दर्द। एक जटिल मन को मिलता है, दर्द। दर्द उसको मिलता है जो प्रेम नहीं जानता, दर्द उसको मिलता है जिसका अहंकार खूब घना होता है। बिमारी है, दर्द।
श्रोता: सर जो प्रेम जानता है, दर्द उसे सबसे ज्यादा मिलता है।
वक्ता: क्या दर्द मिलता है?



