गाँधी को महात्मा, गाँधी ने स्वयं नहीं बनाया इस देश ने बनाया। लोगों को अच्छा लगता था, एकदम दो हड्डी का आदमी चला आ रहा है, एक गाँव से दूसरे गाँव भाग रहा है, उपदेश-यात्रा करे जा रहा है। दोष देना है तो देशवासियों को दो। एक यदि व्यक्ति थे जिनसे जिन्ना घबराते थे, उसका नाम था गाँधी। अंग्रेज़ों को ज़बरदस्त चोट दी थी गाँधी ने। कौन कह रहा है कि गाँधी को तुम भगवान का दर्जा दे दो, लेकिन इंसान को इंसान की तरह तो देखो। वैसा कोई आदमी आज भी खड़ा हो जाए न, अच्छा लगेगा। आसान नहीं होता गाँधी बनना।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैंने आपका एक गाँधी जयंती पर गाँधी जी का वीडियो देखा था और आप पढ़ने पर हमेशा एम्फ़सिस करते हैं। तो मैंने आपको जब से सुनना चालू किया, तब से बहुत पढ़ने पर भी मेरा ध्यान रहता है।
तो मैंने गाँधी जी की ऑटोबायोग्राफी पढ़ी और उसमें मुझे बहुत सारे पॉज़िटिव एस्पेक्ट्स पता चले, जैसे कि उनकी अफ्रीका की जो यात्रा थी, इंडिया में आने के बाद उनका पहला जो सत्याग्रह था, चंपारण सत्याग्रह उनका। नॉन-कोऑपरेशन मूवमेंट में जैसे लोगों का उनको इतना सपोर्ट था, कि बिना कांग्रेस के उन्होंने इनिशिएट किया था नॉन-कोऑपरेशन मूवमेंट। और उसके बाद, जैसे अभी मैं देखता हूँ, तो उनके ऑनेस्टी की काफ़ी मिसालें दी जाती हैं, जो उन्होंने अपनी बुक में काफ़ी अच्छी तरीके से ट्रांसपेरेंसी के साथ बताई भी हैं।
जैसे कि आपने भी बताया था शायद, व्हेन हिज़ फ़ादर वॉज़ ऑन हिज़ डेथबेड, ही वेंट टू हिज़ वाइफ़, द नाइट टाइम।




![[गाँधी जयंती विशेष] मत मानों उनके आदर्शों को, लेकिन उनको एक बार ठीक से पढ़ लो](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-8e708d2d-a5df-48cf-92ec-50fbf0d40a8a/30/image.jpg)