आचार्य प्रशांत: ये जो खाक उड़ रही है हवाओं में, ये कभी अपनी नज़रों में बड़ा गम्भीर मसला थी। बड़े-बड़े महलों में जो रहते थे, उनकी कब्रों को कुत्ते खोद रहे होते हैं। ये औकात है हमारे गम्भीर मसलों की। सबसे गम्भीर मसला तो जीवन ही है न, अभी मर जाओ तो तुम्हारी देह को लोग कहेंगे वहाँ मिट्टी रखी है, मिट्टी। ये हैसियत है हमारी गम्भीरता की। ये भी नहीं कहेंगे वहाँ ‘नवीन’ रखा है, क्या कहेंगे? मिट्टी रखी है वहाँ मिट्टी। और जबतक साँस चल रही है तब तक बड़े गम्भीर हो; अरे! दर्द-ए-दिल दर्द-ए-जिगर। ऐसा चेहरा बना के घूम रहे हो जैसे तुम्हारे लिए ख़ासतौर पर गुरुत्वाकर्षण तीन गुना हो, कन्धे भी नीचे को ख़िचे जा रहे हैं, गाल भी नीचे को खिंचे जा रहे हैं, बाक़ी सामान की तुम जानो!
अहंकार है न अपने दुख को बड़ी गम्भीरता से लेना, है न। हम बड़े महत्वपूर्ण हैं तो हमारे दुख भी तो बड़े महत्वपूर्ण हैं। कैसे-कैसे तो आपने महत्वपूर्ण प्रश्न लिख के भेजे हैं सुभानल्लाह! नहीं, पूछ लीजिएगा, कहीं संकोच में बुरा मान जाएँ। जिसको देखो उसके लिए उसी की कहानी बड़ी महत्वपूर्ण है, सब गम्भीरता से ओतप्रोत। अभी ये (एक श्रोता की ओर इशारा करते हैं) मुस्करा रहे हैं, दो दिन पहले ये भी गहन गम्भीर घूम रहे थे। छोटे बच्चे लड़ रहे होते हैं, तो खींझते हो। गुड्डी कह रही है, ‘गुड्डू मेरी चिज्जू ले गया,’ गुड्डी बोली, ‘गुड्डू मेरी चिज्जू ले गया,’ तुम कहते हो, ‘यार ये इस बात पर मुद्दा बना रहे हैं, ये कोई बात है, ले तू दूसरी चिज्जू ले ले।‘ और हमारा हाल कुछ अलग है? 'गुड्डी की चिज्जू गुड्डू ले गया', ये हमारे जीवन की कहानी है। और गुड्डी खड़ी (रोने का इशारा करते हैं) ढोल बजा रही है। 'नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए, बाकी जो बचा काले चोर ले गये।‘
परमात्मा को छोड़ दो, प्रकृति भी हमारी शक्लें देखकर हैरान रहती है, कहती है, ‘ऐसा तो नहीं पैदा करा था, ये कलाकारी तुमने की कैसे? पैदा तो तुम्हें ठीक-ही-ठाक किया था, ऐसे कैसे हो गये?’ ऐसे ही हो गये। 'और इस दिल में क्या रखा है, तेरा ही दर्द छुपा रखा है,' जिसको देखो उसी के पास दर्द का समन्दर है।
पहाड़ हैं, चिड़िया हैं, कल वापस लौट रहे थे, आधी रात के बाद, रास्ते में इतने खरगोश मिले की पूछो मत, और गाड़ी के आगे आकर खड़े हो जायें। पेड़ हैं, पक्षी हैं, सड़क पर कुत्ते भी हैं, इतना दर्द कहीं दिखाई देता है जितना इंसान के चेहरे पर है? कहीं दिखाई देता है? जानवर मर भी रहा होता है, कट भी रहा होता है, तो भी इंसान से बेहतर हालत में होता है। और वो किसी दूसरे जानवर के पास जाए कि मौसी दर्द बहुत है, तो दूसरा जानवर उसे ज़रा भी घास नहीं डालेगा, कहेगा, 'चल हट, मस्त मौसम है, बारिश हो रही है, चरने दे।‘




