मैंने कहा है कि जिसको छोड़ने में तुम्हें देर लग रही हो, उसको पूरी तरह छूटने का इंतज़ार मत करो। उसको लिए-लिए भागो। यह थोड़ी कहा है कि उसको बाँध कर भागो। आप मान लीजिए, शरीर पर बहुत सारा फैट ढोए हुए हैं, उसको लिए-लिए ही तो भागोगे। लेकिन भागने की प्रक्रिया में क्या होगा? वो गलेगा। मैं तब तक इंतज़ार करूँगी जब तक सब ठीक… नहीं, नहीं, नहीं। जो भी तुम्हारी बुरी हालत है, जैसी भी है, अभी दुर्बल हालत है, शुरू अभी करो। कम ऐज़ यू आर एंड रन ऐज़ यू आर।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। आचार्य जी, आपने आज जो हमने पकड़ लिया है, उसको साथ ढोते हुए समझाया था कि हम थोड़ा-सा उसको ब्रेक दें, फिर ढोए। आपने पहले भी कहा था कि अगर कुछ पकड़ लिया है, कोई बॉन्डेजेस हैं, बंधन हैं, तो तुम उसके साथ ही भागो। उसको अगर छोड़ नहीं सकते, तो उसके साथ भागो।
तो मैं उसके साथ भागने की कोशिश करती हूँ, बोझ के साथ, बंधन के साथ, मुक्ति की तरफ़। उसमें बहुत ज़्यादा संघर्ष करना पड़ता है, पीड़ा होती है, थकान होती है। वो सब तो ठीक है, लेकिन गति नहीं बढ़ रही है। उसके लिए बेचैनी होती है। क्योंकि जब ज्ञान आता है, आप ही ने कहा था कि आपको आकाश दिखेगा, तो आकाश दिखेगा। तो आपके साथ अपने आप ही न यह माइक या कप आपने एक उदाहरण दिया था, छूट जाएगा।
लेकिन वो छूट नहीं रहा है, और आकाश दिख रहा है। तो वो एक बेचैनी अंदर रह रही है। वो अपनी परिस्थिति, अपनी स्थिति समझ नहीं रही हूँ।
आचार्य प्रशांत: आपने जिस तरीके से उस पूरी बात का ढाँचा बनाया है, कुछ छूटेगा भी नहीं। मैंने कहा है कि जिसको छोड़ने में तुम्हें देर लग रही हो, उसको पूरी तरह छूटने का इंतज़ार मत करो। उसको लिए-लिए भागो। यह थोड़ी कहा है कि उसको बाँध कर भागो।




