प्रश्न : जीवन में आत्म-सम्मान कितना ज़रुरी है?
वक्ता : सुधांशु पूछ रहे हैं कि जीवन में आत्म-सम्मान कितना ज़रूरी है? आत्म-सम्मान का सवाल कितने लोगों के लिए महत्वपूर्ण है?
(श्रोतागण हाथ उठाते हैं)
चलो ठीक है, फिर बात कर सकते हैं इस पर। आत्म-सम्मान का अर्थ क्या है?
‘मान’ का अर्थ होता है मान लेना, उसमें तुमने ‘सम’ और जोड़ दिया है । ‘सम-मान’ का अर्थ होता है सम्यक रूप से मानना, ‘सम्यक’ मतलब ‘उचित’। ‘सम्मान’ शब्द को हम समझ रहे हैं । ‘सम्मान’ शब्द का मतलब हुआ ठीक तरीके से मानना।
‘सम्मान’ का मतलब बस मान लेना नहीं है कि बस मान लिया, आँख बंद करके। फिर तो सिर्फ ‘मान’ भी लिखा जा सकता था, जैसे मान-अपमान होता है ।
‘सम्मान’ का अर्थ है ठीक तरीके से मानना, ठीक तरीके से मानने का अर्थ है पहले जानना-फिर मानना। “जानूँगा तभी मानूँगा”। सम्मान’ का अर्थ समझ रहे हो क्या है?




