इंसान भगवान तो है लेकिन इंसान भगवान मात्र नहीं है। तुम भगवान से आगे के कुछ हो। तुम भगवान के अलावा भी कुछ हो। भगवान बेचारा बहुत सीधी-सादी शय है। भगवान सिर्फ़ भगवान है और तुम भगवान और शैतान हो। लेकिन ताल्लुक तुम्हारा ज़्यादा शैतान से है।
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प्रश्नकर्ता: कभी-कभी हमें इन्ट्यूशन्स(अन्तर्ज्ञान) होती है जो चीज़ें होनी होती हैं या हो जाती हैं वैसी। या किसी इंसान से मिलते हैं तो लगता है कि इसको कहीं पहले देखा है या मिले हैं। या कोई घटना हो रही होती है तो लगता है कि घटना पहले घट चुकी है और ऐसा-ऐसा ही हुआ। ऐसा क्यों होता है?
आचार्य प्रशांत: देखो एक तल पर कोई भी घटना नयी नहीं होती है। तो हर घटना जो आज घट रही है वो पहले अनन्त दफ़े घट चुकी है। तो ये बात बिलकुल ठीक है।
तुम आज किसी स्त्री के प्रति आकर्षित हो जाते हो, ये पहली बार हो रहा है? अनन्त दफ़े तुम ही किसी औरत की ओर आकर्षित हो चुके हो। आज से लाख साल पहले भी, करोड़ साल पहले भी, कल भी, परसों भी, यहाँ भी और वहाँ भी। हर जगह तुम-ही-तुम तो हो और वही खेल चल रहा है।
आज तुमको क्रोध आ जाता है, ये तुम्हें पहली बार आ रहा है? नहीं, पहली बार नहीं आ रहा। आज से हज़ार साल पहले भी तुम्हीं तो थे, जो क्रोधित हो रहे थे और आज से लाख वर्ष बाद तुम्हीं होओगे जो क्रोधित हो रहे होगे।
तो एक दृष्टि से देखो तुम यदि, तो कोई घटना नयी तो होती ही नहीं है। तो उसमें अगर तुम्हें लग रहा है कि ये घटना पहले भी घट चुकी है, तो खास क्या लग रहा है। ये तो घट ही चुकी है।




