प्रश्न: 'मेरी गर्लफ्रेंड दूसरी जाति की है, घर वाले शादी के लिए नहीं मान रहे। कृपया इंटरकास्ट मैरिज (अन्तर्जाती विवाह) के बारे में कुछ कहें।
आचार्य प्रशांत: विशाल, मामला क्या वैसा ही है और बस क्या उतना ही है जितना तुमने इन दो पंक्तियों में लिख कर के भेज दिया है — कि गर्लफ्रेंड है, गर्लफ्रेंड दूसरी जाति की है और घरवाले नहीं मान रहे विवाह के लिए। फिर कह रहे हो, 'अन्तर्जाती विवाह के बारे में कुछ कहिए।'
एक जवान आदमी के पास, हर किसी के पास दो चीज़ें होनी चाहिए अगर ज़िंदगी जीने के काबिल बनानी है –— पहला प्रेम और दूसरी चीज़ ताक़त! प्रेम से मेरा आशय है, सही लक्ष्य से प्रेम,! सही दिशा में प्रेम,! जिससे होना चाहिए उसी से प्रेम! और सही वजह से प्रेम। और ताक़त चाहिए, क्योंकि बिना ताक़त के प्रेम सिर्फ़ एक नाकाम आह बनकर रह जाता है, कि प्रेम तो है पर कुछ कर नहीं पा रहे, अपनी मंज़िल की दिशा में बढ़ ही नहीं पा रहे पहुँचना तो बहुत दूर की बात है।
यह दो चीज़ें मैं तुमसे पूछूँगा –, प्रेम है क्या? और ताक़त है क्या? जिससे लड़की से तुमने संबंध बनाया है, क्या उससे वाकई तुमको प्रेम है?
प्रेम जब होता है तो बड़ी स्पष्टता होती है, और प्रेम जब होता है तो प्रेम के पीछे बिलकुल वाजिब वजह होती है। यहाँ पर न तुम अपने बारे में कुछ बता रहे, न लड़की के बारे में कुछ बता रहे है, कुल मिलाजुला करके तुमने अपने संबंध के बारे में यह बताया है कि हमें तो शादी करनी है। यह कौन सा प्रेम है जिसका कुल एक उद्देश्य है, 'शादी'? ऐसा प्रेम क्या वाकई दूसरे की भलाई करेगा? क्या वाकई ऐसे प्रेम में तुम्हारा भी हित है? यह प्रेम ही है या बस जवानी के दिनों में होने वाला साधारण आकर्षण?




