प्रश्नकर्ता: सत्य और अध्यात्म की बात पर। व्हाट इस द डिफरेंस बिटवीन बींग स्पिरिचुअल एंड हैविंग अ स्पिरिचुअल एक्सपीरिएंस (आध्यात्मिक होने में और आध्यात्मिक अनुभव होने में क्या अंतर है) ?
आचार्य प्रशांत: आध्यात्मिक अनुभव जैसा कुछ नहीं होता। आप अगर आध्यात्मिक हैं तो आपके सब अनुभवों में एक सच्चाई होगी। तो आप उसको कह सकते हैं कि चूँकि मैं आध्यात्मिक व्यक्ति हूँ, तो इसीलिए मुझे जो कुछ भी अनुभूत होता है मैं उसे गहराई से जान लेता हूँ। तो फिर सभी अनुभव आध्यात्मिक हैं।
पर हम जिस अर्थ में कहते हैं आध्यात्मिक अनुभव, वो अर्थ बहुत ही व्यर्थ है। हम कहते हैं कि हूँ तो मैं साधारण सा आदमी, लेकिन मेरे सामने एक विशेष मौका आया, और तब मुझे एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव हुआ। मैं वही हूँ जो मैं हूँ, लेकिन मुझे एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव हो गया। ये वैसी सी बात है कि मैं तो फटीचर आदमी हूँ लेकिन मेरी लॉटरी लग गई।
ऐसे नहीं होता, ये सब संयोग अध्यात्म में नहीं चलते। आपने सुना होगा कि मैं जा रहा था, जा रहा था, उन पहाड़ों पर जा रहा था, तभी सूरज ढलने लगा और मेरे सामने एक झरना आ गया, और मैं उस झरने पर थोड़ी देर के लिए रुक गया। और फिर मैं पानी पीकर वहीं बैठ गया, और एक टक धार को देखने लगा और तभी मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे फलाने देवता आसमान से मेरे ऊपर पुष्प वर्षा करने लग गए। तो ये आध्यात्मिक अनुभव हो गया।
या ‘मुझे ऐसा प्रतीत होने लग गया कि मैं खुद भी झरने का पानी हूँ। मैं अपने शरीर से बाहर निकल करके झरने का पानी बन गया और मैं झरने के साथ-साथ बहने लग गया और फिर मुझे पता चला कि जीवन भी तो एक बहाव ही है। और ये देखिए इस तरह से मुझे एक प्रगाढ़ आध्यात्मिक अनुभव हुआ। लोग बोलते हैं न प्रोफाउन्ड स्पिरिचुअल एक्सपीरिएंस।




