प्रेम है सत्य पर न्योछावर हो जाना और रोमांस है झूठ को ज़िंदगी बना लेना। जो चीज़ चाहने लायक है उसको चाहा, ये प्रेम है।रोमांस, प्रेम की भ्रूणहत्या कर देता है। रोमांस, प्रेम को पैदा ही नहीं होने देता। रोमांस भावना पर चलता है, भावना वृत्ति की बहन है बिलकुल;बहुत क़रीबी रिश्ता है दोनों में। रोमांस में ये अनिवार्य शर्त होती है कि सामने वाला आपको आपसे बिलकुल भिन्न लगे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते, आचार्य जी। आप कहते हैं कि प्यार, रोमांस नहीं है। बुद्धि के स्तर पर ये बात समझ में आती है लेकिन अपने दैनिक जीवन में जब मैं काफ़ी सफल जोड़ों को देखती हूँ तो उनमें से अधिकतर को आध्यात्मिक रूप से जीते नहीं देखती।
वे बहुत ही संसारिक, भौतिक जीवन जीते हैं। बाहर रेस्ट्रान्ट(भोजनालय) जाते हैं, मांस खाते हैं, ख़रीदारी करते हैं, पार्टी करते हैं लेकिन एक-दूसरे के साथ बहुत ख़ुश दिखायी देते हैं। जब मैं ऐसे ख़ुश जोड़ों को वास्तविक जीवन में देखती हूँ तो मुझे जो सच्चाई समझ में आयी है उसी पर शक होने लगता है।
ऐसी कई वेबसाइट्स हैं, कई डेटिंग प्लैट्फॉर्म्स हैं जो सफल प्रेम कहानियों का दावा करते हैं। मैं आपसे समझना चाहती हूँ कि वास्तव में प्रेम क्या है? और क्या प्रेम सच में रोमांस नहीं है?
आचार्य प्रशांत: रोमांस माने क्या होता है? रोमांस क्या है? हमें उसकी परिभाषा नहीं पता तो हम उस तक उसकी जो उड़ती-उड़ती फ़िल्मी छवियाँ आ जाती हैं हम उसी को रोमांस समझ लेते हैं न। हम तक जो मनोहर कहानियाँ आ गयीं, फ़िल्मी छवियाँ आ गयीं हम उनको सोच लेते हैं कि यही तो रोमांस है।




