आर्थिक निर्भरता, भावनात्मक आघात और घरेलू हिंसा के बीच व्यक्ति अक्सर अपनी वास्तविक समस्या को पहचान नहीं पाता। रिश्ते कई बार प्रेम से अधिक मजबूरी और निर्भरता पर टिके होते हैं। आत्मनिर्भरता व्यक्ति को भय और विवशता से मुक्त कर सही निर्णय लेने की शक्ति देती है। दूसरों की सहायता करने से पहले स्वयं को सुरक्षित, स्वतंत्र और सशक्त बनाना आवश्यक है, क्योंकि स्वतंत्रता के बिना न संबंध स्वस्थ हो सकते हैं और न जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या मैं आपसे दो मिनट चलते-चलते ही बात कर सकती हूँ? प्लीज़ सर।
अच्छा जी, मैंने बहुत मार पिटाई खाई है अपने घर पर, और मैं बहुत बाग़ी टाइप की हो गई थी, रिवोल्यूशनरी टाइप की। मैं पढ़ती थी, मैंने सीएस किया हुआ है, लॉ किया हुआ है। मेरी जॉब भी थी कॉर्पोरेट में, पर सुकून नहीं मिलता था। उसके बाद, कॉर्पोरेट के बाद मैंने लॉ जॉइन किया, और फिर मेरी लाइफ़ में काफ़ी सारी चीज़ें चेंज हुईं।
एक लड़का मेरी लाइफ़ में आया, मैं इमोशनली उससे बहुत अटैच हो गई थी। और मैंने सोच ही लिया था कि मुझे इसके साथ ही लव मैरिज करनी है। हम दोनों के बीच में काफ़ी कुछ अच्छा चल रहा था। शादी, उसने भी कहा था कि कर लूँगा, लेकिन फिर जब टाइम आया तो एक दिन पहले ही हम रात को बैठ के मैगी खा रहे थे, और अगले दिन सुबह उसने मना कर दिया कि मैं नहीं कर सकता।




