
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा एक क्वेश्चन है। जो ये रिवर की बुक में मैंने एक चीज़ सीखी। जो ये लोग हैं न, मेरे प्रयागराज में एक संगम है, वहाँ पर बहुत सारा पॉल्यूशन होता है, उसके अंदर बहुत सारी पन्नी पड़ी रहती हैं। उसके अंदर बहुत सारी पन्नी पड़ी रहती हैं और वो अंदर तैरती रहती हैं पूरा। पूरा ऐसा पॉल्यूशन होता रहता है।
आचार्य प्रशांत: तुम्हें रोकना है। तुम्हें समझना है वो सारा जो बाहर का पॉल्यूशन है, वो भीतर की गंदगी से आता है। भीतर की गंदगी तुम्हें हटानी है, तभी बाहर का पॉल्यूशन रुकेगा। ठीक है? नियम-कायदे होने चाहिए, उनसे मदद मिलती है। लेकिन सिर्फ़ नियम-कायदों से पॉल्यूशन अगर रुकता होता, तो सबसे तगड़े नियम-कायदे तो वेस्ट में हैं और वो दुनिया के सबसे बड़े पॉल्यूटर्स हैं। नियम-कायदों से बस इतना होता है कि जहाँ नियम बना होता है, वहाँ पॉल्यूशन नहीं करते, अपना पॉल्यूशन आप जाकर कहीं और कर देते हो इनडायरेक्टली। ठीक है?
तो बाहर हवा साफ़ हो सके, नदी साफ़ हो सके, इसके लिए पहले दिल साफ़ होना चाहिए।
प्रश्नकर्ता: मेरा एक क्वेश्चन।
आचार्य प्रशांत: हाँ, बोलो-बोलो।
प्रश्नकर्ता: कि मैं थर्ड क्लास में था अभी, और अभी फ़ोर्थ क्लास में आया हूँ। थर्ड क्लास में मैंने एक बुक में पॉल्यूशन पढ़ा था। तो क्या थर्ड क्लास किसी लोगों ने नहीं पढ़ी है क्या? क्या बहुत सारे लोगों ने पढ़ी है?
आचार्य प्रशांत: थर्ड क्लास तो, बेटा, सबने पढ़ी है, लेकिन पॉल्यूशन को समझने वाले लोग बहुत कम हैं। बहुत अच्छा सवाल है तुम्हारा। थर्ड क्लास तो पढ़ी है, सबने ही पढ़ी है।
प्रश्नकर्ता: तो पढ़ी है, बट उन्होंने ये चीज़ पढ़ी है, पॉल्यूशन, तो वो और पॉल्यूशन क्यों फैला रहा है?
आचार्य प्रशांत: बेटा, नियत होनी चाहिए न। सिर्फ़ जानने से नहीं होता। पॉल्यूशन के जो फ़ैक्ट्स हैं, जो नॉलेज है, वो तो बहुत आसान है, सिंपल है, स्ट्रेट है। आप जान जाओगे, बहुत आसानी से जान जाओगे। सच बात तो ये कि आप पढ़े-लिखे नहीं हो, तो भी आप समझ जाओगे कि पॉल्यूशन क्या चीज़ है, कहाँ से आती है। लेकिन पॉल्यूशन आता है हमारी कंफर्ट से, हमारी डिज़ायर्स से और हमारी इरिस्पॉन्सिबिलिटी से। है न? वो हटाने के लिए पहले नियत सही होनी चाहिए। है न?
नियत माने इरादा, इंटेंशन। हाँ तो इन लोगों के पास नॉलेज है पर इंटेंशन नहीं है। तो इसीलिए उन्हें सब कुछ पता है पॉल्यूशन का, फिर भी पॉल्यूशन करते हैं। सब जानते हैं कि जो कर रहे हैं उससे पॉल्यूशन होगा, लेकिन फिर भी करते हैं। क्योंकि नॉलेज अपने आप में काफ़ी? ज़रूरी होता है नॉलेज, लेकिन काफ़ी नहीं होता, नेसेसरी बट नॉट सफ़िशिएंट। हाँ? दिल अच्छा होना चाहिए, उसके बिना नॉलेज काम नहीं आता। तो आप सबको बोलो, अपना दिल अच्छा करिए। ज़ोर से बोलो।
प्रश्नकर्ता: सब अपना दिल अच्छा करिए।
आचार्य प्रशांत: बोलो, “गंगा साफ़ करनी है, तो पहले दिल साफ़ करिए।”
प्रश्नकर्ता: “गंगा साफ़ करनी है, तो पहले दिल साफ़ करिए।”