दूसरों के शरीर को ऐसे नहीं छुआ जाता, दूसरों की ज़िंदगी में ऐसे नहीं घुसा जाता||

सिविलाइजेशन की एक बड़ी पहचान होती है, 'रिस्पेक्ट फ़ॉर इंडिविजुअलिटी।' कोई पूछे, ‘सिविलाइजेशन, सभ्यता की परिभाषा क्या है?’ निजता का सम्मान बढ़ने लगता, जैसे-जैसे सभ्यता बढ़ती है। और अगर निजता का सम्मान नहीं बढ़ रहा है तो जान लो कि हम अभी बहुत असभ्य लोग हैं। पर्सनल स्पेस की कद्र करना सीखिए। शारीरिक तौर पर भी और मानसिक तौर पर भी। न किसी के शरीर पर चढ़िए, न किसी के मन पर चढ़िए।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी अभी कुछ दिन पहले ही अपने ही एक दोस्त से बात कर रहा था मैं, जो अभी हाल-फ़िलहाल में म्युनिख की ट्रिप करके आए हैं। म्यूनिख, जर्मनी। तो मेरी भी कुछ साझा एक्सपीरियंसेज़ (अनुभव) रहे क्योंकि मैं भी अबू धाबी और फ़िलीपींस से अभी रिसेंटली (हाल ही में) आ रहा हूँ। तो कुछ चीज़ें हैं जो उनके और मेरे डिस्कशन से साझा हमने निकाली। मैं पॉइंट्स में लिखकर लाया हूँ, जो पहले आपके सामने रखूँगा, फिर मैं अपना प्रश्न।
तो उस ट्रिप में हमने देखा कि काफ़ी आसान था भारतीयों को…
आचार्य प्रशांत: म्यूनिख से कोई सज्जन यहाँ आ रहे थे फिर?
प्रश्नकर्ता: मेरी और उनकी वार्तालाप हुई है।
आचार्य प्रशांत: तो वो आ चुके हैं।



