मैंने कहा है, “सत्य एम्प्लॉइड” होने को। सेल्फ भी हम आप पढ़ते हो अंग्रेज़ी में, छोटा सेल्फ, बड़ा सेल्फ। सेल्फ एम्प्लॉइड मतलब “सत्य एम्प्लॉइड” भी हो सकता है और “अहम् एम्प्लॉइड” भी हो सकता है। उसमें बात ये नहीं होती कि आपके पे-चेक पर आपका साइन है या किसी और का साइन है, बात ये नहीं होती। बात ये होती है कि उस काम के माध्यम से सेवा किसकी हो रही है। किसकी सेवा हो रही है, ये देखना होता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। तो आपने बताया कि जैसे आपने अपनी जॉब में सिंहासन को नमन नहीं किया ऐंड यू लेफ्ट द जॉब। तो अभी मेरे मन में द्वंद आ रहा है, लाइक मैं स्कूल में हूँ और मतलब जिस तरीके से मैं संस्था से जुड़ी हुई, अपने अंदर मैंने बदलाव देखा बच्चों के प्रति भी और प्रेम भाव पैदा हुआ। तो मुझे एक कॉन्फ्लिक्ट ये आ रहा है कि मैनेजमेंट की अपनी एक्टिविटीज़, जो होती हैं, नाच-गाना ये सब, वो एक जगह मैं होते हुए देखती हूँ और दूसरी जगह मैं बच्चों के पास जा रही हूँ, कबीर साहब को लेकर या उनको अवगत कराती हूँ, रिगार्डिंग एनवायरमेंट, क्लाइमेट चेंज।
तो मुझे ये लग रहा है कि जो मैं कर रही हूँ, शायद वो करुणा कर्तव्य है, तभी मैं वहाँ रहना चाहती हूँ क्योंकि मैंने बहुत ज़्यादा चेकलिस्ट भी बनाई ये देखने के लिए कि यहाँ पर कोई मेरी कामना तो नहीं जिसकी वजह से मैं टिकी हुई हूँ।
और दूसरा प्रश्न है, ये कि शायद मैंने आपकी बातें, मतलब मिसअंडरस्टैंड की हैं कि हम सबको सेल्फ एम्प्लॉइड हो जाना चाहिए। मतलब ऐसी जगह पर नहीं रहना चाहिए जहाँ पर सत्य को छोड़कर दूसरी जगहों को नमन किया जा रहा है। तो मुझे समझ नहीं आ रहा है, कि मैं सही जगह पर हूँ की नहीं।




