पुरुष रिश्तों में कठोर और शोषक रहे हैं, आप भी कठोर और शोषक हो जाएँ, तो आप आधुनिक नहीं हो गईं। आधुनिकता के नाम पर सेक्शुअलिटी का वेपनाइज़ेशन खूब चल रहा है। मुआवज़ा उगाहने की माँग को छोड़िए। मुआवज़े की ज़िंदगी जियोगे, तो आत्मसम्मान खो बैठोगे। बिल्कुल हो सकता है कि आपके पति, पिता, भाई, परंपरा, समाज ने आपका नुकसान किया हो। लेकिन इनको दोष देते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अपनी ज़िंदगी अपने हाथों में लीजिए। ख़ुद भी मुक्त जियो और दूसरे को भी मुक्ति दो।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मध्य प्रदेश में आपका स्वागत है।
आचार्य प्रशांत: मैं मध्य प्रदेश का ही हूँ। जब आप पैदा नहीं हुई थीं, मैं उससे पहले से मध्य प्रदेश का हूँ।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अभी हाल ही में देखने को मिल रहा है कि कुछ महिलाएँ हैं, जो अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करके पुरुषों को मानसिक रूप से, सामाजिक रूप से और कानूनी तरीक़े खोजकर वो मानसिक तौर पर इमोशनल ब्लैकमेल करके और विक्टिम कार्ड खेल के, उनको प्रताड़ित कर रही हैं।
इसमें मेरा सवाल ये है कि क्या ये वाक़ई में कोई स्वतंत्र महिला है, या फिर ये भी एक तरीक़े से अंधविश्वास से ग्रस्त स्त्री है? एक दमित स्त्री में और एक मुक्त, भ्रमित स्त्री में क्या वास्तविक अंतर होते हैं? मैं वो आपसे जानना चाहती हूँ।




