पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी। इंस्पेक्शन हुआ था गवर्नमेंट एजेंसी से, तो उनको बोला गया था कि भाई, ये सब ठीक करो; उन्होंने ठीक नहीं किया। रेगुलेशंस का उल्लंघन हुआ है, और उसके बाद जो वहाँ चल रहा था, वह बस बेहोशी का समाँ है, उसमें कुछ भी करो। हमारा कोई भी उत्सव हो, समारोह हो, उसका मतलब ही यही होता है कि चेतना को और गिरा दो। हमारे मन में यह बात डाल किसने दी कि सेलिब्रेशन माने इंटॉक्सिकेशन? फिर उसी का एक एक्सट्रीम रूप हमें देखने को मिलता है; ये जो पच्चीस-पचास मौतें हो गईं।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। ये अभी एक गोवा में बड़ी दुखद घटना हुई, जिसमें क़रीबन 25 लोगों की जानें गईं, और उस घटना के बारे में मैं सोच रहा था। फिर कुछ वीडियोज़ भी उस घटना के आए सोशल मीडिया के ऊपर। उसमें दो चीज़ें दिखती हैं। एक तो जो तंत्र है, उसने अपना काम किया नहीं। जो भी रेगुलेशंस वग़ैरह हैं, वो सब नहीं हुए। लेकिन फिर मैं वीडियो देख रहा था, और उस वीडियो में ऐसा मैंने देखा कि आग लग रही है, लोग वहाँ पर फिर भी बने हुए हैं, इस आशा में कि शायद कोई बुझा लेगा, हम बच जाएँगे। और उससे पहले जो हो रहा था, वो एंटरटेनमेंट चल रहा था, और लोग गए भी वहाँ पर पूरे एंटरटेनमेंट के लिए थे।
मुझे ऐसा लग रहा था कि उस टाइम पर क्यों तुरंत वो भाग नहीं रहे। क्या चीज़ उन्हें वहाँ पर रोककर रखे हुई है, वो एंटरटेनमेंट, वो एक तरह की मेरी कामना है कि ठीक है, सब कुछ हो जाएगा, ठीक हो जाएगा, और कंटिन्यू करेंगे इसी चीज़ को। और ये ऐसा नहीं है, ये और भी बहुत सारी जगहों पर हुआ है।
तो इसमें एक और, इससे पीछे मेरा भी अपना एक जो फँसा हुआ है, और शायद अभी भी फँसा हुआ है, जिसमें निर्णय नहीं हो रहा है, वो




