जिसको जितना होता है, उतना पूरा नहीं लग रहा। हर आदमी अपनी चादर थोड़ा और फैलाना चाहता है, बस यही बात है। साधारण-सी चीज़ है कामना, कामना पूरी करने के लिए अगर इधर-उधर के तरीकों का इस्तेमाल करना पड़े, तो आदमी कर लेता है। उसमें दो चीज़ें होती हैं, एक तो जो आपकी व्यवस्था है या तो वो इतनी साफ़, सही और सख़्त हो कि वो गुंजाइश ही न छोड़े अवैध या अनैतिक तरीकों की, तो भी भ्रष्टाचार नहीं होगा।
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प्रश्नकर्ता: सबसे पहले तो सादर प्रणाम, आचार्य जी। मेरा प्रश्न ये है, कि अभी मैं देख रहा था तो करप्शन जो है, इस समय, मतलब भारत की बात करें या ग्लोबल स्तर पर भी बात करें, तो एक काफ़ी बड़ा मुद्दा है। और अपेक्षातः अगर हम देखें, तो भारत में करप्शन की दर जो है, वो सामान्य देशों के मुकाबले ज़्यादा ही है। जो बाक़ी विकसित देश हैं या जो नहीं भी विकसित हैं, भारत में उनके मुकाबले काफ़ी ज़्यादा दर है करप्शन की। और यदि हम बात करें, तो अगर मैं किसी सामान्य भारतीय से सवाल पूछता हूँ कि करप्शन अभी भी है, ऐसा कुछ ख़त्म नहीं हुआ है, भले ही कोई भी सरकारें आईं या बदलीं, चेंज हुआ, कुछ भी हुआ, बट अभी भी वो ऐज़ इट इज़ ही है, कुछ बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
तो कई लोगों का तर्क उस पर ये आता है कि पहले करप्शन होता था, मगर वो सिर्फ़ करप्शन ही था। अब जो है, करप्शन हो रहा है तो उसके साथ-साथ में डेवलपमेंट हो रहा है। मतलब अगर सौ रुपए किसी ने किसी से लिए, तो तीस रुपए भले ही खा रहे हों, मगर सत्तर रुपए वो विकास में ख़र्च कर दे रहे हैं। तो करप्शन को हम पूरी तरीके से नेग्लेक्ट नहीं कर सकते हैं, वो सिस्टम में रहेगा।




