भारत कोई ज़मीन का टुकड़ा तो है नहीं। जैसे भारतवासी आज के हैं, आज का भारत भी वैसा ही होगा। यहाँ हवा गंदी है, क्योंकि भीतर से हम गंदे हैं। सड़कों पर गड्ढे हैं, क्योंकि हम गड्ढे हैं। बाहर जो कुछ होता है, वो आपके भीतरी जगत का प्रतिबिंब होता है, एक अर्थ में। इंसान जगेगा, तो ये नज़ारा बदलेगा। जो तुम्हारी वास्तविक हालत है, उसको आँखें खोल करके देखो। उसको देख लोगे, तो फिर उससे आगे निकलने का रास्ता मिल जाएगा।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, मैं अभी एक न्यूज़ पढ़ रहा था रिसेंटली जो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट हुआ बैडमिंटन का इंडिया में, उसके रिगार्डिंग। तो बहुत सारे डेनिश खिलाड़ी थे जिन्होंने कुछ हाइजीनिक प्रॉब्लम्स और कोर्ट को रिलेटेड प्रॉब्लम्स दर्ज करीं। और हमारे जो बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, उसका जवाब ऐसे आया कि हम उस पर काम कर रहे हैं; कुछ-कुछ जगह पर काम हो गया है। और एक तरह से उन्होंने कहा कि ये रेयर इंसिडेंट है। और ये भी इसमें शामिल था कि जब वो इस बात को कह रहे हैं, हमें और भी बहुत सारे केसेस मिले, जहाँ पर केसेस और होते जा रहे हैं, होते जा रहे हैं।
तो एक ऐसा इंस्टीट्यूशन, जहाँ पर एक बैडमिंटन का सबसे बड़ा एक इंटरनेशनल इवेंट होने जा रहा है, वहाँ पर कोई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी आ रहा है, वो इंडिया के बारे में ऐसा कह रहा है, और फिर भी कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं ली जा रही है।




