एक वस्त्र अभी बचा है, उसको भी उतार दो || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। अभी जैसे मनोरंजन की बात हो रही थी, तो एक प्रश्न है जो मेरे दिमाग में आया। बॉलीवुड के एक अभिनेता हैं जिनका नाम है रणवीर सिंह। हाल ही में उन्होंने अपना एक न्यूड फोटो शूट (निर्वस्त्र फोटोशूट) करवाया। तो इस पर उनके फ़ैन्स बोलते हैं कि ये तो वो बात हो गई–माई बॉडी माई चॉइस, हिज़ बॉडी हिज़ चॉइस (मेरा शरीर मेरा चुनाव उसका शरीर उसका चुनाव)।
आपको अगर देखना हो, तो देखिए तस्वीरों को। ना देखना है, तो ना देखिए। और नग्न होना, तो बहुत ही सहजता की बात है। हम तो हो ही सकते हैं नग्न। और दूसरी तरफ़ दूसरा विचार है कि भाई ये तो अश्लीलता है। इस चीज़ को क्यों प्रोमोट (बढ़ावा) किया जा रहा है? तो मैं इन दोनों विचारों में थोड़ा सा परेशान हूँ। तो इन दोनों विचारों में आप थोड़ा स्पष्टीकरण दे देते।
आचार्य प्रशांत: क्या तुम तब परेशान होते हो जब इंस्टाग्राम पर नग्न स्त्री शरीर को देख रहे होते हो? तब तो लोग पैसा दे देकर देखते हैं। उस व्यक्ति ने जो किया सो किया, उसकी चर्चा कर लेंगे। पर इतना हंगामा क्यों बरपा है? ये कोई नई चीज़ थोड़े ही हो रही है। ये तो रोज़ हो रहा; है न?
ये लिंगभेद है। मैं विरोध कर रहा हूँ। जेंडर इक्वालिटी (लैंगिक समानता) होनी चाहिए, मैं तुम्हारे सवाल में तुम्हारा साथ नहीं दे रहा। वैसे ही नग्न स्त्री शरीरों को आप पैसा दे-देकर देखते हो। इंटरनेट का ज़्यादा से ज़्यादा ट्रैफ़िक (भीड़) उसी दिशा में जाता है। इंस्टाग्राम चलना बंद हो जाए, अगर नग्नता ना हो।और इंस्टाग्राम तो छोटी चीज़ है। पॉर्न इंडस्ट्री (देह व्यापार) की तो बात ही क्या करनी। तब तो इस तरह की आऊटरेज (अत्यधिक क्रोध) देखने को नहीं मिलती। ये क्या है?
अरे दुनिया में इतने जीव हैं, भाँति-भाँति के पशु-पक्षी हैं, जंतु हैं। कोई नंगा लोट गया, तो तुम्हें क्या समस्या हो गई? मेरे खरगोश हैं, सड़क पर कुत्ते हैं, सब अपने-अपने प्राकृतिक व्यवहार का प्रदर्शन करते रहते हैं। तुम काहे के लिए पगला रहे हो? और पगलाना है, तो फिर दोनों लिंगों पर पगलाओ। फिर ये नहीं चलेगा कि ढाई इंच कपड़े वाली


