दुनिया का सबसे बुरा काम क्या? (चौंक जाएँगे!) || आचार्य प्रशांत (2021)

प्रश्नकर्ता: बचपन से ही घर में इन्हें शिक्षा ये दी गयी है कि अच्छे बनकर रहो और सबके साथ अच्छाई करो। बत्तीस वर्ष उम्र के इतने सालों में अपनी समझ से अच्छाई ही अच्छाई करी है। और नतीज़ा इनको हमेशा बुरा मिला है। जिनके लिए भी अच्छा करा, उनसे बदले में बुराई मिली है। दोस्तों से, यारों से, यहाँ तक की अक्सर घरवालों से भी। कह रही हैं कि अब मन टूटने सा लगा है, किसी पर भी भरोसा नहीं किया जाता। मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? जब मैं किसी का बुरा नहीं चाहती तो मुझे बदले में बुराई क्यों मिली?
आचार्य प्रशांत: देखिए, आईशा आप अच्छे कामों और बुरे कामों और अच्छे नतीज़ों और बुरे नतीज़ों की बात कर रही हैं। आप शायद सोचती हैं कि अच्छा काम ये हैं कि अच्छाई करो। और अच्छाई क्या है? कि किसी को सहारा दे दो, माने उससे दो भली बातें बोल दो, किसी को रूपये-पैसे की ज़रूरत हो तो दे दो, कोई और किसी तरह की मदद माँग रहा है, उसको दे दो। और बुरा काम हम क्या समझते हैं?
बुरा काम हम समझते है कि किसी को डाँट दिया, फटकार दिया, किसी की चोरी कर ली, किसी का दिल दुखा दिया, किसी का हक मार लिया। ये सब हम बुरा काम समझते हैं। है न? तो यही एक मानसिक आपका ढाँचा है, एक मेन्टल फ्रेमवर्क(मानसिक ढाँचा) है। उसपर आपने अपनी ज़िन्दगी जी है अपने बत्तीस सालों में। और ये जो आपका फ्रेमवर्क रहा है, ये जो आपके उसूल रहे हैं, सिद्धान्त ये तो ज़ाहिर है कि आपके काम आये नहीं, क्योंकि उन पर चल कर आपको दुख मिल रहा है काफ़ी।
तो कहीं-न-कहीं चूक तो हो ही रही है। अब कहाँ हो रही है? यहाँ हो रही है कि देखिए, बुरे काम ये होते होगें कि किसी का हक मार लिया, किसी का दिल दुखा दिया, किसी के साथ हिंसा कर दी। लेकिन समझिएगा कि दुनिया का सबसे बुरा काम क्या है? और अगर आप समझ गयीं कि दुनिया का सबसे बुरा काम क्या है। तो फिर ये भी आप समझ जाएँगी कि आपको ज़िन्दगी में इतनी बुराई क्यों झेलनी पड़ रही है दूसरों से।



