उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों का तनाव केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि इतिहास, सामाजिक भय, आर्थिक असुरक्षा और प्रतिस्पर्धी शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है। परिवार, कोचिंग संस्कृति और सफलता की संकीर्ण परिभाषाएँ छात्रों पर भारी दबाव डालती हैं। समाधान केवल काउंसलिंग नहीं, बल्कि ऐसी समग्र शिक्षा है जो रचनात्मकता, खेल, कला, दर्शन, आत्मबोध और स्वतंत्र चुनाव को महत्व दे, ताकि विद्यार्थी केवल करियर नहीं, बल्कि संतुलित और सार्थक जीवन भी जी सकें।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आई एम अ सेकंड ईयर पीएचडी स्टूडेंट हियर। मैंने आईआईटीज़ में देखा है कि स्टूडेंट्स काउंसलिंग के लिए जाते हैं, और आईआईटी भी काफ़ी पैसे स्पेंड कर रहे हैं काउंसलिंग सर्विसेज़ के लिए। और स्टूडेंट को शॉर्ट टर्म में रिलीफ़ भी मिलता है। उनका मेंटल स्ट्रेस कम होता है।
बट माय क्वेश्चन इज़: व्हाट इज़ द…, मतलब स्टूडेंट को कैसे अप्रोच करना चाहिए जब उनको मेंटल स्ट्रेस होता है? एंड इंस्टिट्यूट किस वे से लाइक लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन की तरफ़ स्टूडेंट को मोटिवेट कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: देखिए, सबसे पहले तो जो पूरा सवाल है न, उसमें स्टूडेंट




