आचार्य प्रशांत: हम क्यों चाहते हैं बच्चा? और ये ख़तरनाक है सवाल पूछना क्योंकि हमें नहीं पता हम क्यों चाहते हैं। हम सिर्फ़ इसलिए चाहते हैं क्योंकि सबके पास बच्चा है। जैसे कि ये (एक श्रोता की ओर इशारा करते हुए) बोले कि उनके पास भी गुब्बारा है, उसके पास भी गुब्बारा है, मम्मी, मुझे भी गुब्बारा दिलाओ न। अब पूछो, ‘गुब्बारा चाहिए क्यों?’ तो उसके पास कोई जवाब नहीं होगा।
श्रोता: शादी करने में भी वही होता है।
आचार्य: तो शादी भी ऐसे ही होती है। ‘सबकी हो गयी, मैं ही रह गया।’ ‘चल बेटा, दौड़ लगा।’ (श्रोतागण हँसते हैं)
श्रोता: शुरुआत तो वहीं से होती है।
आचार्य: हाँ।
श्रोता: लेकिन आचार्य जी, कन्विन्स (मनाना) कैसे करें?
आचार्य: या तो कन्विन्स कर लो या कंसीव (गर्भधारण) कर लो। देख लो क्या करना है।




