अगर प्रेम जैसा कुछ होता तो स्त्री को पुरुष से ही क्यों हो रहा है, पुरुष को स्त्री से ही क्यों हो रहा है? और एक उम्र के ही व्यक्ति से क्यों हो रहा है? पुरुष से भी करना है तो अस्सी साल वाले से क्यो नहीं करते जाकर? क्यों नहीं करते हो? ये सारी आशिकी समवयस्क लोगों में ही क्यों होती है? या अधिक-से-अधिक पाँच-दस साल का अन्तर। बोलो? बात नहीं समझ में आ रही? ये सारी आशिकी रिप्रोडक्टिव पीरियड में ही क्यों होती है? नहीं बात समझ में आ रही? और उसी से जुड़ी जो बाकी चीज़ें हैं, अकेलापन और बाकी सब जो कुछ भी होता है, ये साइड इफेक्ट्स ही होते हैं, लोनलिनेस और ये सबकुछ। ये सब बस एक चीज़ है, एक चीज़ है, अन्त में प्रकृति चाहती है, तुम बच्चा पैदा कर दो।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मैं प्रेम के बारे में जानना चाहती हूँ। मैं पाँच साल से किसी के साथ थी और अब मुझे खुद को उसके साथ नहीं रहना है। मैं जानना चाहती हूँ कि क्या हम किसी को प्यार करने के लिए खुद को मजबूर कर सकते हैं, और ये मुझे पता तब चला जब मैं किसी और की तरफ़ आकर्षित हुई। तो मुझे जानना है कि मुझे चाहिए क्या जो मैं अलग-अलग लोगों से जुड़ना चाहती हूँ और हो क्या रहा है ये।
आचार्य प्रशांत: आपको वही चाहिए जो इस संसार में हर कीट-पतंगे को, हर पशु-पक्षी को, जलचर हो, थलचर हो, नभचर हो, सबको चाहिए। आपको वही चाहिए जिसके कारण इतनी करोड़ों प्रजातियों का अस्तित्व है, और विकास की पूरी धारा करोड़ों साल से बहते-बहते यहाँ पहुँच गयी है। सब जीवों में वो आवेग न उठे तो कैसे प्रकृति का खेल आगे बढ़े? क्यों आपको ऐसा लग रहा है कि आपको कुछ अलग, कुछ विशेष चाहिए? इतनी तो साफ़ बात है न। उसमें संशय, भ्रम भी कहाँ हो जाता है?
छोटी रही होंगी आप पाँच साल की तो हम कहते हैं, ‘हमारी सहेलियाँ हैं।‘ तब तो नहीं पुरुषों से मित्रता हो जाती थी, पर पाँच से पन्द्रह का होते ही पुरुष प्यारा लगने लगता है स्त्री को। कुछ नहीं है, पाँच की थी तो भीतर कुछ रसायन थे, पन्द्रह की हो गयी तो अलग तरह के रसायन आ गये। पुरुष भी पन्द्रह का हो गया, उसमें भी कुछ रसायन आ गये। दोनों रसायन एक-दूसरे को खींच रहे हैं।







