तीन युवा और तीन सवाल: पढ़ाई, कैरियर, परिवार || आचार्य प्रशांत (2021)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। थोड़ा-सा पहली बार आया हूँ तो थोड़ा-सा बता दूँ कि कैसे आप तक पहुँचा। बहुत ज़ोर से भाग रहा था, मास्टर्स (स्नातकोत्तर) में एडमिशन (प्रवेश) लिया। कैरियर के लिये ही तमाम चीज़ें, आशाएँ और एम्बिशन्स (महत्वाकांक्षा) ढेर सारे। ज़ोर से भाग रहा था, आपकी वीडियो अचानक पड़ गयी तो पहले तो कुछ दिन तक बहुत अच्छा लगा, दो-चार दिन तक। फिर मैं भागने लग गया और फिर काफ़ी तकलीफ़ में मतलब, एक टाइम ऐसा भी आ गया, धीरे-धीरे लोगों से कंसल्ट (सलाह) करने लगा कि किसी तरह से आपकी बात ग़लत प्रूव (साबित) हो जाये कि मैं आगे बढ़ पाऊँ क्योंकि मैं बढ़ नहीं पा रहा था। मुझे ऐसा लगता था कि कुछ ग़लत हो जाएगा अगर आपकी बात ग़लत प्रूव किये बिना अगर मैं आगे गया तो।
तो धीरे-धीरे रोकने की कोशिश करता था। प्रॉमिस (वादा) भी किया था कि नहीं, वीडियोज़ नहीं देखनी हैं, किसी भी हाल में ब्लॉक कर देना है चैनल या जो भी। लेकिन फिर धीरे-धीरे पता नहीं एक दिन ऐसे ही लगभग पाँच-छः महीने बीत गये थे। लॉकडाउन का टाइम था, अचानक से मैंने कब छत पर था और वीडियोज़ खुल गयी। तो उस पर थोड़ी जमने लगी फिर से बात कि शायद मैंने ग़लत इन्टरप्रेट (व्याख्या) कर लिया है। फिर धीरे-धीरे अच्छा लगने लगा, फिर से भागना चालू हो गया। फिर धीरे-धीरे आना-जाना लगा रहा, फिर ठीक हो गया कि मुझे लगा कि नहीं अब भागने से काम नहीं चलेगा, जानना पड़ेगा, समझना पड़ेगा।
तो फिर तब से लगातार सुन रहा हूँ। काफ़ी टाइम हो गया है लेकिन अभी भी वो है सवाल कि कौन से पाथ (रास्ता) पर जाना है। काफ़ी सारी प्रॉब्लम्स (समस्या) सॉल्व (हल) हो गयी हैं। आपको सुनता हूँ, ओशो को सुनता हूँ, कृष्णमूर्ति को भी सुनता हूँ। बातें समझ में आती हैं लेकिन अभी भी वो वाली चीज़ है कि कैरियर किस साइड (तरफ़) में लेकर जाना है। क्योंकि मास्टर्स मेरा ख़त्म हो रहा है तो इस वजह से अब थोड़ा मैं कोशिश कर रहा हूँ कि क्या चूज़ (चयन) करूँ।



