सुख की असली परिभाषा क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)

प्रश्नकर्ता: तलब एक हैप्पिनेस (खुशी) है सर, हैप्पिनेस को किस तरह कन्सिडर (मान) कर सकते हैं?...कि मतलब हमारी जो इच्छाएँ हैं वो पूरी हो जाएँ? या उसमें कोई दुख वगैरह उसको कन्सिडर करते हैं? सर एक लाइन (पंक्ति) है कि हर लाइफ़ (जीवन) की एक हैप्पी एंडिंग (सुखान्त) होती है, अगर आप उस समय दुख में हैं तो वो हैप्पी एंडिंग नहीं है, तो वो हैप्पी एंडिंग नहीं है।
आचार्य प्रशांत: तुम लोग कैसी-कैसी तो बातें करते हो, कहाँ-कहाँ से लाइनें लेकर के आते हो, मैं हैरान हूँ। आज शाम को मैं ईशावास्योपनिषद् पर बोलने जा रहा हूँ। इतनी तकलीफ़ मुझे उसको समझने में नहीं हुई जितनी तुम्हारे वचनों को समझने में होती है। किस ऋषि ने ये बात बोली है जो तुमने अभी बोली ये, बताओ? कि हर कहानी की एक हैप्पी एंडिंग होती है और ये सब। ये किस वेद में लिखा है? किस धर्मग्रन्थ से आयी है ये बात?
प्र: सर, फ़ेसबुक की फोटो से...
आचार्य: फ़ेसबुक की फोटो से आयी है। अब मैं यहाँ इसलिए बैठा हूँ कि फ़ेसबुक की फोटोज़ को। (श्रोतागण हँसते हैं।)
आचार्य: तुम क्यों फ़ेसबुक की आड़ी-तिरछी फोटो पढ़ते हो? तुम्हें पढ़ने के लिए कुछ और नहीं है? मैं हैरान, अभी भी झटके में हूँ, सदमे में हूँ; मैं जवाब क्या दूँ तुम्हारी बात का? हर स्टोरी (कहानी) की एक हैप्पी एंडिंग होती है और हैप्पी एंडिंग



