प्रश्नकर्ता: मन हल्का कैसे रहे?
आचार्य प्रशांत: "मन हल्का कैसे रहे, थका-थका नहीं रहे, विश्राम में कैसे रहे?"
विश्राम का विपरीत होता है – तनाव। तनाव में नहीं, विश्राम में, शांति में रहे।
मन कैसे रहे विश्राम में?
जब तुम विश्राम में होते हो, तब कुछ कर रहे होते हो? कुछ कर-कर के विश्राम में होते हो क्या? हमारा सवाल है – “कैसे हो जाएँ विश्राम में?” निश्चित रूप से हम जानना चाहते हैं – क्या करें विश्राम में होने के लिए? मैं पूछ रहा हूँ, कुछ कर के विश्राम मिलता है, या तनाव मिलता है?
जब तुम होते हो विश्राम में, तो क्या कुछ कर रहे होते हो? ये करना ही तो हमारी बीमारी है। तनाव तो इसी से मिलता है। करना बीमारी क्यों है? क्योंकि करने के पीछे ये भाव है कि जो कमी है, वो कर के पूरी हो जाएगी।
फिर से उस आदमी के पास जाओ जिसने घर में खोया है हीरा, और ढूँढ रहा है बाहर। वो बाहर क्या कर रहा है? खोज कर रहा है। वो क्या कह रहा है? “खोज करके कमी पूरी हो जाएगी, खोज करके विश्राम मिल जाएगा, शांति मिल जाएगी, रिलैक्स्ड (तनाव-रहित) हो जाऊँगा।”




