ये जो विमेन बॉक्सिंग रिंग है, ये सिर्फ़ एक रिंग नहीं है, ये उस संघर्ष की निशानी है, जो महिलाओं ने बहुत शताब्दियों तक किया है। ‘मिलियन डॉलर बेबी’ फ़िल्म है जिसमें एक महिला बॉक्सर चैंपियन कह रही है कि “मुझे मृत्यु तक मंज़ूर है, लेकिन गरिमाहीन जीवन मंज़ूर नहीं है।” महिला की उन्नति पर सिर्फ़ महिला की उन्नति निर्भर नहीं करती; पुरुष, राष्ट्र और पूरा विश्व भी इस बात का इंतज़ार कर रहा है कि महिला अपने आप को महिला से ज़्यादा मनुष्य जानना शुरू करे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो आप सबका हार्दिक आभार कि सातवीं एलिट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के इस अवसर पर आपने मुझे आमंत्रित किया। और मंच को नमस्कार, सब माननीय गण जो यहाँ पर उपस्थित हैं।
हम सब यहाँ पर बैठे हुए हैं और हमारे सामने ये महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता है, जो आयोजित होने जा रही है, और इस वक़्त यहाँ पर काफ़ी एक उत्सव का माहौल है। तो दो बातें मैं आपसे कहना चाहूँगा, दो दिशाओं से। पहली बात ये कि हम यहाँ तक पहुँचे कैसे हैं, और दूसरी बात ये कि आगे की हमारी संभावना क्या है। कोशिश करूँगा कि संक्षेप में बोलूँ, क्योंकि यहाँ पर जो असली काम है वो तो रिंग के भीतर होने जा रहा है; तो मैं कोशिश करूँगा कि अपनी बात को जल्दी मैं आपके सामने रख दूँ।
देखिए, अभी भले ही हमने यहाँ पर एक बहुत अच्छा, सद्भावना-पूर्ण माहौल बनाया है, जिसमें हम सबको बहुत प्रसन्नता हो रही है; लेकिन हमारी यहाँ तक की राह आसान नहीं रही है।
विमेन बॉक्सिंग तब से अस्तित्व में है, अनौपचारिक रूप से, इन्फ़ॉर्मल




