देवी की पूरी कथा, सिद्धांत और दर्शन दुर्गासप्तशती ग्रंथ से आता है। जिन्होंने दुर्गासप्तशती नहीं पढ़ा है, वो मनोरंजन और कई तरह की अभद्रताएँ करके नवदुर्गा का दुरुपयोग करेंगे। यह ग्रंथ मुक्तिदाता है। देवी तुम्हारे भीतर के बंधनों का भी प्रतीक है और स्वयं ही मुक्तिदात्री भी हैं। माँ कहती हैं — “तुम मुझसे जो माँगोगे मिलेगा; तुम्हें मुक्ति चाहिए तो मैं मुक्ति दे दूँगी और तुमको मनोरंजन और भोग चाहिए तो मैं तुम्हें यह दे दूँगी।” तुम जो माँगोगे, जीवन तुम्हें वही देगा। तुम सही माँगना सीखो।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। आजकल नवरात्रि के दिन चल रहे हैं। और मैं देख रहा हूँ कि बहुत समय से जितने विडियोज़ हैं, उन पर नवरात्रि से जुड़े प्रश्न आ रहे हैं लोगों के। उसमें से एक प्रश्न था जो मुझे लगा कि आपके सामने उसे रखना काफ़ी ज़रूरी है। ये एक युवक का प्रश्न था, उनका नाम सिद्धार्थ है, वो पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं।
तो देश में मेरे ख़्याल से नवरात्री अगर सबसे धूमधाम से कहीं मनायी जाती है तो वो पश्चिम बंगाल ही है और उसी के विषय में कुछ बातें वो बता रहे थे। उनका कहना था कि हर साल ये जो दिवस है ये पूरी तैयारियों के साथ मनाया जाता है। दो-दो महीने पहले से ही लोग कपड़े ख़रीदना शुरू कर देते हैं। और जो बाज़ार है उसमें आप पाएँगे कि जो पीक सेल्स का समय होता है, वो नवरात्रि के समय पर ही आता है।
पर साथ-ही-साथ देखते हैं कि इसमें कुछ विकृतियाँ भी हैं। जैसे कि उन्होंने एक ऐड देखा था, जहाँ पर एक लड़का और एक लड़की नवरात्रि के एक पण्डाल में खड़े हैं। जैसे कि माता के सामने फूल अर्पित किए जाते हैं; वो व्यक्ति माता की जगह एक युवति को फूल समर्पित कर रहा था। दूसरी जगह उन्होंने ये पढ़ा कि नवरात्रि के ही दिनों में, बंगाल में जो शराब होती है, जो नशा होता है उसकी बहुत ज़्यादा वृद्धि शुरू हो जाती है। और इसी तरह से उन्होंने दो-तीन एक्जांपल्स




