Durgasaptashati

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का महत्त्व
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का महत्त्व
24 min
हमेशा पूछा करो कि यह जो ग्रंथ है, क्या यह अपने केंद्र में मेरी समस्या को रख रहा है? अगर रख रहा है, तो वह ग्रंथ आपके काम का है। दुर्गा सप्तशती में सुरथ और समाधि की जो समस्या है, वह हमारी, आपकी, सबकी समस्या है। कौन-सी समस्या? आदमी का मोह में ग्रस्त रहना, आदमी का अपमान पाकर दुख झेलना। यह बात आज भी हो रही है। अगर आप यह समझ पाएँ, तो आगे फिर आपको देवी से बोध और आशीर्वाद प्राप्त होगा।
एक छोटा-सा वायरस ही काफी है || आचार्य प्रशांत, नवरात्रि विशेष, आठवाँ दिन (2021)
एक छोटा-सा वायरस ही काफी है || आचार्य प्रशांत, नवरात्रि विशेष, आठवाँ दिन (2021)
9 min

आचार्य प्रशांत: प्रकृति देवी हैं जो कहती हैं कि मुझे भोगोगे, तो तुम्हें नष्ट कर दूँगी। प्रकृति को भोगा नहीं कि प्रकृति तुम्हें नष्ट कर देगी। अभी तो आगे तुम्हें बहुत एकदम भौंचक्का कर देने वाली बात पता चलेगी। जब शुम्भ-निशुम्भ का आगे चलकर वध होता है और इसमें तो

देवी में भी इतना क्रोध?
देवी में भी इतना क्रोध?
5 min
तुम्हारा क्रोध किसके लिए है? ममत्व तुम में रहेगा। प्रश्न यह है कि तुम्हारा ममत्व किसके लिए है? राग द्वेष भी रहेंगे, भय भी रहेगा, लोभ भी रहेगा। किसका लोभ कर रहे हो? मुक्ति का लोभ कर रहे हो या बंधनों का? और मुक्ति का तरीका ही यही है। तुम्हारे पास जो कुछ भी है उसको बांध दो मुक्ति से। क्योंकि और कोई विकल्प है कहां तुम्हारे पास? तुम तो जो हो वो हो ही। तुम अपना शरीर परिवर्तित नहीं कर सकते। तो अपनी वृत्तियों की हत्या नहीं करनी है। उनको सत्य का अनुगामी बना देना है।
स्वयं में शक्ति को कैसे प्रकट करें?
स्वयं में शक्ति को कैसे प्रकट करें?
4 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जिस तरह से दैत्यों की सेना के बारे में बताया है कि करोड़ों की संख्या में और बहुत पावरफुल (शक्तिशाली), बहुत सारे सैनिक हैं तो ये क्या जो हमारी वृत्तियाँ हैं उसकी पावर (शक्ति) के बारे में बताया जा रहा है?

आचार्य प्रशांत: बिलकुल, बिलकुल वही है।

चाहते ही गए हमेशा, और चाहतों से बर्बाद हुए || आचार्य प्रशांत, दुर्गासप्तशती द्वितीय चरित्र (2023)
चाहते ही गए हमेशा, और चाहतों से बर्बाद हुए || आचार्य प्रशांत, दुर्गासप्तशती द्वितीय चरित्र (2023)
71 min

आचार्य प्रशांत: दुर्गा सप्तशती ले रहे हैं। उसका जो मध्यम चरित्र, दूसरा चरित्र है, तीन चरित्र हैं उसमें। तो जो दूसरा उसका चरित्र है, वो अध्याय दो-तीन-चार से आता है। इसमें प्रकृति माने देवी अपने रजोगुणी रूप में प्रकट होती हैं। ठीक है? यहाँ जो उनका नाम है, वो है

जीवन में ताकत और तेज लाने का उपाय || आचार्य प्रशांत, नवरात्रि विशेष, छठा दिन (2021)
जीवन में ताकत और तेज लाने का उपाय || आचार्य प्रशांत, नवरात्रि विशेष, छठा दिन (2021)
10 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी इस पूरे दृष्टान्त में जब भी देवी प्रकट होती हैं तो काफ़ी तेज दिखाया जाता है। और तेज देवी का प्रकट होना तभी दिखाते हैं जब देवों द्वारा बुलाया जाता है। तो अगर जीवन में तेज नहीं है। अर्थात् देवी नहीं है तो क्या यही मतलब है

इन हरकतों से देवी प्रसन्न हो रही हैं? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - प्रथम चरित्र (2022)
इन हरकतों से देवी प्रसन्न हो रही हैं? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - प्रथम चरित्र (2022)
45 min

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, आजकल नवरात्रि के दिन चल रहे हैं। और मैं देख रहा हूँ कि बहुत समय से जितने विडियोज़ हैं उनपर नवरात्रि से जुड़े प्रश्न आ रहे हैं लोगों के। उसमें से एक प्रश्न था जो मुझे लगा कि काफ़ी ज़रूरी है आपके सामने उसे रखना। और

काली कौन हैं? शराब-माँस पर विवाद क्या? || आचार्य प्रशांत (2022)
काली कौन हैं? शराब-माँस पर विवाद क्या? || आचार्य प्रशांत (2022)
41 min

प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, अभी कुछ दिनों से मैं एक घटनाक्रम को फॉलो कर रहा था। जिसमें एक महिला फिल्ममेकर (चलचित्र निर्माता) हैं जिन्होंने माँ काली पर एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करी है, बनाई है। जिसके पोस्टर पर उन्होंने माँ काली को बीड़ी या सिगरेट पीते हुए दिखाया है। जिस पर

देवी का रहस्य क्या? शक्ति का अर्थ क्या? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - तृतीय चरित्र (2022)
देवी का रहस्य क्या? शक्ति का अर्थ क्या? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - तृतीय चरित्र (2022)
59 min

आचार्य प्रशांत: तो आज हम दुर्गा सप्तशती के तीसरे चरित्र में प्रवेश कर रहे हैं और पिछले चरित्र का और पिछले अध्याय का अन्त किसके वध पर हुआ था?

श्रोता: महिषासुर।

आचार्य प्रशांत: महिषासुर के वध पर हुआ था, तो महिषासुर का वध हो गया था और देवता लोग प्रसन्न

ऐसे नहीं प्रसन्न होती हैं देवी || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती पर
ऐसे नहीं प्रसन्न होती हैं देवी || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती पर
45 min

प्रश्नकर्ता: नमस्ते, आचार्य जी। आजकल नवरात्रि के दिन चल रहे हैं। और मैं देख रहा हूँ कि बहुत समय से जितने विडियोज़ हैं, उनपर लोगों के नवरात्रि से जुड़े प्रश्न आ रहे हैं। उसमें से एक प्रश्न था जो मुझे लगा कि आपके सामने उसे रखना काफ़ी ज़रूरी है। यह

Related Articles
इस्लाम में सुधार कैसे हो? धर्म में कट्टरता के नतीजे क्या होते हैं?
इस्लाम में सुधार कैसे हो? धर्म में कट्टरता के नतीजे क्या होते हैं?
34 min
ये साइकिल तो जब भी चलेगा तो वो दुख का ही होता है जो भवचक्र होता है ना तो ज्ञानियों ने कहा कि उसमें तो दुख ही है। हमें तो कुछ ऐसा चाहिए कि वह चक्र टूट जाए। अगर ऐसा होना है कि आप तथाकथित रूप से आधुनिक और लिबरल हो जाओगे, बिना जाने स्वयं को तो उस लिबरलिज्म के खिलाफ ऐसा विद्रोह उठाएगा कि जल्दी ही फिर आपको धार्मिक होना पड़ेगा। और बिना स्वयं को जाने आप यह जो धार्मिक स्ट्रक्चर लेकर के आओगे, यह भी अंधा होगा। आत्मज्ञान के बिना में एक लिबरल स्ट्रक्चर भी अंधा होता है। और आत्मज्ञान के अभाव में एक धार्मिक स्ट्रक्चर भी अंधा होता है।
श्रीकृष्ण सोलह हज़ार रानियों के साथ एक साथ कैसे?
श्रीकृष्ण सोलह हज़ार रानियों के साथ एक साथ कैसे?
16 min
सबसे पहले तो ये जो सोलह हज़ार का आँकड़ा है, ये प्रतीक है। ये प्रतीक है अनंतता का। सोलह हज़ार माने बहुत, बहुत सारे। गिने ना जा सकें, इतने। और फिर कहा जा रहा है कि ये जो पूरी अनंतता है, इस पूरे को श्रीकृष्ण उपलब्ध हैं और पूरे-के-पूरे उपलब्ध हैं। रानियों की श्रद्धा है। और श्रीकृष्ण ही ऐसे हैं, मात्र श्रीकृष्ण ही, जिनमें सैंकड़ों, हज़ारों, लाखों लोग पूर्ण श्रद्धा रख सकें। कहानी हमसे कहती है कि तुम यदि सत्य के प्रेमी हो, तो सत्य तुम्हें पूरा-का-पूरा उपलब्ध हो जाएगा। ये बात बस तुम्हारे और सत्य के बीच की है। इसमें कोई और शामिल है नहीं।
To Understand The Quran, Go To It With A Clean Mind
To Understand The Quran, Go To It With A Clean Mind
7 min
Before you go to the Quran, you must first be in a condition to understand what it is saying. The center of the Quran is Tauheed – Oneness. The Quran can be understood only when you, as the ego-mind, are connected to the same source that blessed the Prophet. Otherwise, you will misinterpret it. You are so full of ego that you want to remain what you are. By remaining what you are, if you apply your intellect to the scriptures, you will obviously distort them.
स्त्री को बंधन नहीं, शिक्षा दो
स्त्री को बंधन नहीं, शिक्षा दो
17 min
स्त्री घर की धुरी है, घर का केंद्र है। तुमने अगर उसको बंधन में रख दिया, अशिक्षित रख दिया, तो पूरा घर बर्बाद होगा। लड़कियों में ये भावना बचपन से ही डाल दी जाती है कि तुम्हारी ज़िन्दगी तो दूसरों के लिए है। सबके लिए आप जो सबसे ऊँची सेवा कर सकती हैं, वो है आपकी शिक्षा। आप अगर अज्ञान और अँधेरे में रहेंगी, तो किसी का भला नहीं होने वाला है। पर-निर्भरता आपको कहीं का नहीं रहने देगी।
जब महिला पर हमला हो, और महिला ही दोषी कहलाए
जब महिला पर हमला हो, और महिला ही दोषी कहलाए
18 min
अगर आपको कोई छेड़ रहा हो लड़का और मैं आकर के वहीं पर सशरीर उस लड़के को रोक दूं और उसको भगा दूं तो आपको लगेगा आचार्य जी ने मदद करी। लेकिन अगर मैं ऐसा माहौल पैदा कर रहा हूं कि जिसमें यह छेड़ाछाड़ी की घटनाएं घटे ही कम तो बात उतनी साफ-साफ पता नहीं चलती। ऐसा लगता नहीं कि कुछ हुआ। लेकिन असली महत्व का काम तो यही है कि सारी बदतमीजियां मन से पैदा होती हैं और मन को ही साफ करना पड़ेगा। लेकिन इस प्रक्रिया में समय लग सकता है। तो जो टैक्टिकल एक्शन होता है, जो तत्काल करना होता है, वो चीज यह नहीं होती।
आश्रित महिलाएँ और अध्यात्म
आश्रित महिलाएँ और अध्यात्म
17 min
जो आश्रित महिलाएँ हैं, इनको सबसे बड़ी सज़ा यह मिलती है कि इनका अध्यात्म की तरफ़ बढ़ने का रास्ता बिल्कुल रोक दिया जाता है। परमेश्वर की ओर कैसे बढ़ोगे अगर पति ही परमेश्वर है? जो कैद में है, उसके लिए साधना है — दीवारों को तोड़ो और बाहर आओ। बाहर निकलकर कोई नया ज्ञान, कला, या कोई कुशलता सीखो।
Science and Spirituality Always Go Hand in Hand
Science and Spirituality Always Go Hand in Hand
5 min
The most common thing in spirituality and science is 'an honest urge to know the Truth.' Science observes the external universe, and spirituality observes the mind. These two have to be in tandem. The one thing that enables true knowledge in any field is honesty and integrity.
What’s Wrong with a Woman Choosing to Stay at Home?
What’s Wrong with a Woman Choosing to Stay at Home?
11 min
Your target should be to accomplish the most extraordinary task in your life. The one at the bottom should also aim for the highest one. It is illogical to say that being at home means washing clothes. You have a washing machine for that! Why don't you leave it and wash them manually? All the technologies are available because you can allot your time to all those things that are much more important so that you are able to complete the task of the highest order.
Are Women Really Empowered Today?
Are Women Really Empowered Today?
5 min
In the jungle, the woman existed only to breed — not to be an artist, scientist, explorer, or thinker. Internally, women still live in this bondage today, driven by these primal instincts, seeking security and protection, even if they appear externally empowered. And internal bondage is far worse than external. This is where wisdom literature becomes her true rescue—when she knows herself, she can use her body for liberation.
What Makes a Woman Beautiful?
What Makes a Woman Beautiful?
17 min
The woman is not beautiful; the man is not beautiful either. Truth and compassion are beautiful. The compassionate one stands head and shoulders above the gorgeous woman or the handsome man. And this is possible only when love and appreciation for the right, gender-independent values are fostered in both the man and the woman.
Shivling: Understanding Before the Debate
Shivling: Understanding Before the Debate
28 min
Now comes the deeper symbolism of Shivlinga. It says—look, if you have taken birth, then you are there in the body. But even while living in the body, you have to live as if you are without a body. So, the shape of the Yoni that you see in the Shivalinga is actually the world or the body, and this Lingam that you see in the middle of it is the Consciousness—the Consciousness which is located in the body.
लड़कियां तो पराया धन हैं
लड़कियां तो पराया धन हैं
13 min
धन माने जिसकी अपनी कोई चेतना नहीं। धन माने जो सदा किसी और के स्वामित्व में रहेगा, वो धन है। धन कभी बोल नहीं सकता कि मैं अपने हिसाब से खर्च होऊँगा। धन ऐसा बोल सकता है? धन माने वो जो किसी की प्रॉपर्टी है। और अगर आपको किसी का इस्तेमाल अपने हिसाब से करना है, तो बहुत ज़रूरी है कि उसकी चेतना उससे छीन कर उसे ऐसे ही जड़ बना दो। बात ये नहीं है कि स्त्री पराया धन है, कि अपना धन है — वो धन क्यों है? किसी का धन नहीं है वो, वो एक स्वतंत्र चेतना है, मनुष्य है।
Should I Marry or Chase My Dreams?
Should I Marry or Chase My Dreams?
26 min
If you are well-educated, use your education for your empowerment, and that power will give you the leverage to live life on your own terms. Else, anybody—everybody—they'll ride roughshod over you. And you will internalize it. One resists only to the point there is a point in resisting. And after that point, what do you do? You succumb. You start pretending as if you are in the situation by choice. Because you know very well there is no point resisting anymore. You flip sides. Let that not happen to you.
How to Abide in The Shiva Truth? On Ribhu Gita
How to Abide in The Shiva Truth? On Ribhu Gita
11 min
So 'know', don’t try to know about Shiva. Shiva is not furniture. Shiva is not a tree. Shiva is not a cloud, not even the sky. How will you know Shiva? Do you know of anything that has no shape, no form, and is eternal? How will you know Shiva? But know, do know. What can you know? This world and yourself. Know that. That knowing is Shiva-ness. Shivatva.
असली तीर्थ क्या है?
असली तीर्थ क्या है?
8 min
संतों ने इतना समझाया कि असली तीर्थ है आत्मस्नान, और आत्मस्नान यदि नहीं हो रहा है, तो तुम गंदे ही रह जाओगे। अभी हमारी हालत यह है कि हम भीतरी गंदगी और बढ़ा रहे हैं धर्म के नाम पर। जब मन की मैल बचाकर रखनी होती है, तो फिर हम गंगा को भी बस मैला ही करते हैं। जब हम भीतर के पशु को समझकर उससे आज़ाद नहीं होते, तो बाहर वाले जितने पशु होते हैं, उनके साथ भी बड़ा अत्याचार करते हैं।
दो कैदी अगर साथ रहते हों, तो उसे प्यार नहीं कहते
दो कैदी अगर साथ रहते हों, तो उसे प्यार नहीं कहते
39 min
जिसको आप बोलते हो "पैट्रिआर्की", जो मेरी दृष्टि में सिर्फ देह भाव का दूसरा नाम है। उसको हटाने का तरीका अध्यात्म है। पैट्रिआर्की फेमिनिज्म से नहीं हटने वाली। पैट्रिआर्की आत्मज्ञान से हटेगी। यह फेमिनिज्म वगैरह सब ऐसे ही हैं, आती-जाती चीजें। थोड़ी बहुत इनसे तरक्की हो सकती है, नारेबाजी ज्यादा होगी। सचमुच अगर पूरी मनुष्यता का ही स्तर उठाना है, स्त्री का भी, पुरुष का भी, तो तुम्हें कोई विचारधारा नहीं चाहिए तुम्हें आत्मज्ञान चाहिए, सेल्फ नॉलेज। स्वार्थ मत बांधो देह से।
Ghosts Flee from Hanuman’s Power
Ghosts Flee from Hanuman’s Power
6 min
Mahavir Hanuman is to be taken as the representative of truth. When you are close to the truth, then stupid imaginations do not bother you. Bhoot Pishaach Nikat Nahi Aawe, Mahavir Jab Naam Sunawe. When you are close to the truth, then stupid imaginations do not bother you. That's what these words mean, that's all.
God, Allah, Ram: One Truth, Many Names
God, Allah, Ram: One Truth, Many Names
23 min
Some say 'God', others say 'Allah', and some say 'Ram'; all three refer to the same entity. If a name or sound reminds you of the nameless one, it's wonderful. The problem arises with self-appointed meanings. The purpose of religion is to convey the truth, not obstruct it. You have a variety of flutes, but there is one music. Religion is that music.
Reclaiming Authenticity in a World of Impressions
Reclaiming Authenticity in a World of Impressions
7 min

Right since our birth, we are trained to conduct ourselves according to others’ expectations. Everything about us seems to come from outside; every single identity is social. We write in prescribed ways, speak in acceptable tones, worship in traditional patterns, hold sanctioned beliefs about life, and shape our responses to

क्या लुक्स से मिलती हैं महिलाओं को नौकरियाँ?
क्या लुक्स से मिलती हैं महिलाओं को नौकरियाँ?
27 min
एक लड़की की बचपन से परवरिश ही ऐसे की जाती है कि देह ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। देह दिखाकर पति मिल गया, और देह ही दिखाकर अगर बॉस भी मिल जाता है, नौकरी मिल जाती है, तो क्या अनर्थ हो गया? सबसे पहले तो महिला को मनुष्य बनना पड़ेगा। जिस दिन वह देखने लगेगी कि ऐसे जीने में कोई ज़िंदगी नहीं, कोई गरिमा नहीं, उसी दिन यह खत्म होगा। ज़िंदगी में हर वो विषय, जो आपको मनुष्य की बजाय महिला बनाता हो, उसे नकार दीजिए।
Girl, Set your Standards High
Girl, Set your Standards High
7 min
Inductive effect—one wrong role model, one very wrong kind of mediocre but powerful person—mediocre but powerful, attractive, and glitzy. And this fellow becomes the impression creator, the goal setter, and he induces a lot of batchmates into the wrong kinds of attitudes, lifestyle, and ultimately, wrong life decisions. And that can be taken care of very easily—just give your daughter the right role models. Right role models. Give her great books.
हिंदू धर्म ख़तरे में क्यों है?
हिंदू धर्म ख़तरे में क्यों है?
19 min
धर्म की आज के समय में जो आपको हानि दिख रही है, वह इसीलिए है क्योंकि हमारा धर्म आचरणवादी, परंपरावादी हो चुका है। कुछ भी ढकोसला या अंधविश्वास चल रहा हो, हम तत्काल उसका संबंध धर्म से जोड़ देते हैं। ऐसे काम, जो कोई आम आदमी अपनी ज़िंदगी में करे तो कहेंगे—'पागल है, मूर्ख है, यह सबके लिए ख़तरा है, इसे पागलखाने में डालो'—वही काम जब धर्म के नाम पर होते हैं, तो सम्माननीय हो जाते हैं।
How to Use Prakriti for Liberation?
How to Use Prakriti for Liberation?
10 min
All three gunas, all said and done, belong to prakriti, and you have to move beyond prakriti, move beyond your association with prakriti, move beyond your consumption of prakriti. Even sattva can become an object of consumption. Don't we know of so many learned and knowledgeable people whose knowledge becomes their identity, who eat their knowledge? Just as it is possible to get trapped in tamas and raja, it is equally possible to get trapped in sattva.
महँगी शादियों पर मर मिटा भारत
महँगी शादियों पर मर मिटा भारत
52 min
भारत दुनिया के सबसे बीमार देशों में है, सबसे कुपोषित देशों में है। और कोई देश शादी, व्याह पर पर उतना नहीं खर्च करता, जितना भारत करता है, वेडिंग इंडस्ट्री कहीं उतनी बड़ी नहीं है, जितनी भारत में है। हमें सीधा-सीधा संबंध नहीं दिखाई दे रहा, हमारी दुर्दशा में और हमारे फ़िजूल खर्चों में? छोटा-मोटा फ़िजूल खर्चा नहीं है ये कि बस एक जाकर के कहीं से आप एक शर्ट खरीद लाए जिसकी आपको ज़रूरत नहीं थी। ये दुनिया में कोई नहीं करता। और ये हमें करने के लिए मजबूर किया जा रहा है ― पैसे के भौंडे प्रदर्शनों के द्वारा, ग्लैमर (ठाठ-बाट) दिखा-दिखाकर के और अरमान जगा-जगाकर के हमें मजबूर किया जाता है।
श्रीकृष्ण कब अवतरित होंगे?
श्रीकृष्ण कब अवतरित होंगे?
7 min
जब-जब तुम सच्चाई की ओर नहीं बढ़ते, तब-तब जीवन दुख, दरिद्रता, कष्ट, रोग और बेचैनियों से भर जाता है। अधर्म अपने चरम पर चढ़ जाता है, और विवश होकर तुम्हें आँखें खोलनी पड़ती हैं। तब मानना पड़ता है कि तुम्हारी राह ग़लत थी, और ग़लत राह को छोड़कर तुम्हें सत्य की ओर मुड़ना पड़ता है। अतः जब तुम अंधेरे को पीठ दिखाते हो, तो श्रीकृष्ण को अपने समक्ष पाते हो। यही श्रीकृष्ण का अवतरण है।
श्रीमद्भगवद्गीता दूसरा अध्याय २, श्लोक 15-24
श्रीमद्भगवद्गीता दूसरा अध्याय २, श्लोक 15-24
45 min
मनुष्य की देह होने भर से आपको कोई विशेषाधिकार नहीं मिल जाता, यहाँ तक कि आपको जीवित कहलाने का अधिकार भी नहीं मिल जाता। सम्मान इत्यादि का अधिकार तो बहुत दूर की बात है, ये अधिकार भी नहीं मिलेगा कि कहा जाए कि ज़िन्दा हो।
Is Secularism Possible Without Religion?
Is Secularism Possible Without Religion?
5 min
A secular person is one who does the right thing irrespective of his religious association. And if you want this, then you should be deeply religious. Because in secularism, you want equanimity, a certain detachment, respect towards divergent opinions, and non-violence; but who teaches these things? Religion. Therefore, if secularism is in strife with religiosity, it means both are misplaced. The religiosity is fake, and the secularism is shallow.
लड़कियाँ पराई क्यों?
लड़कियाँ पराई क्यों?
17 min
इसमें किसी तरह का कोई धार्मिक पक्ष नहीं है कि लड़की को पराया मानो, उसे घर से विदा करो। आप जीवन भर अपनी लड़की को अपने घर रख सकते हैं और यह बात पूरी तरह धार्मिक है। इसमें कोई अधर्म नहीं हो गया। आज आर्थिक तौर पर लड़की-लड़का दोनों बराबर हैं। यदि बराबर हैं तो लड़का भी आ सकता है उसके यहाँ रहने के लिए। कुछ समय वो आ जाए रहने, कुछ समय वो चली जाए। बाकी समय दूर-दूर रहो, अलग रहो, ज़्यादा शांति रहेगी।
Kumbh in the Light of Vedanta: Truth Beyond Tradition
Kumbh in the Light of Vedanta: Truth Beyond Tradition
13 min

Immortality, and the meaning of life, is the theme of Kumbh. Seen with clarity, everything in the Kumbh narrative revolves around escaping death.

Another Kumbh festival is here. There are several ancient stories behind Kumbh. If the stories are taken merely as tales or folklore, then religion risks becoming merely

Kumbh: Truth Beyond the Myth
Kumbh: Truth Beyond the Myth
28 min
Amrit is at the center of the story. And where can we get Amrit from? By self introspection. The more a person knows himself, the more he will become free from himself. Free from death. What you think of yourself is known as death. And the more you look at yourself, the more you understand that what I think of myself is all futile. I'm actually not that. Negation, Neti Neti. Amrit does not mean gaining something. Amrit means being free from death.
How Do I Retain This Beautiful Silence?
How Do I Retain This Beautiful Silence?
6 min
Silence is not just the absence of sound. Sound has its utility. Let there be a lot of sound and yet let there be silence and that silence is not cultivated through discipline. It is just a matter of the mind being aware of anything outside it but also of itself.
Marriage Under Parental Pressure
Marriage Under Parental Pressure
6 min
Nobody can prepare you for anything that is against the law of freedom. Especially when you are an adult irrespective of where the childhood was; irrespective of how the conditions back then, where one lives in this particular moment and there is no obligation to carry the load of the past. There is absolutely no need. When I say need, what I mean is something that you cannot dispense away with. If this thing is happening to you, there surely is choice involved in it. And if it is your choice, it can be reversed.
बोर्ड टॉपर हो या ऐथलीट, लड़की तो बस देह है
बोर्ड टॉपर हो या ऐथलीट, लड़की तो बस देह है
27 min
तो जो लोग इस बच्ची के देह पर या शक्ल पर अभद्र टिप्पणियाँ कर रहे हैं, उनको पता भी नहीं है कि उनकी उन टिप्पणियों का स्रोत क्या है। इसलिए उठ रही है क्योंकि तुम्हारे घरों में, गली-मोहल्लों में और शहरों में, वास्तव में स्त्रियों के लिए कोई ऊँचा स्थान नहीं है। तुमने उनको यही बना रखा है, घर की सजावट की चीज़ें, घर का सेवक और ये मत कहिएगा ये पुरानी बात है। आज भी बहुत सारे धर्म गुरु और कथा वाचक जो बातें कहते हैं उसमें सुनिए कि महिलाओं के लिए क्या संदेश रहता है कि अगर महिला ने पति की थाली में खा लिया तो पति मर जाएगा या उसे कुछ हो जाएगा। लेकिन पति की जूठी थाली में अगर महिला खाएगी तो स्वर्ग पाएगी और पति के अगर पाँव दबाएगी तो घर में लक्ष्मी आएगी। अगर उसे पति के पाँव ही दबाने है तो बोर्ड टॉप करके क्या कर लेगी!
Liberation Seems Distant, Gratification Seems Easier. What to Do?
Liberation Seems Distant, Gratification Seems Easier. What to Do?
12 min
One has to come to a certain purposelessness with respect to what one has always been doing. And when one comes to that purposelessness, that’s now like being with a clean slate. One does not like the words futility. So something within us just silently conspires from inside. So there is futility but then in that futility some meaning will be found. And that’s a conspiracy. There is purposelessness but some meaning will be attached to the word purposeless and that defeats the whole thing.
धर्म का विकृत व प्रचलित रूप है "लोकधर्म"
धर्म का विकृत व प्रचलित रूप है "लोकधर्म"
31 min
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण को बोलना पड़ता है, “अर्जुन! ये सीधा-सीधा श्लोक है बिल्कुल इन्हीं शब्दों में है; अर्जुन! जब तक तुम वेदों की सकाम ऋचाओं से ऊपर नहीं उठते, जब तक जो काम्य कर्म हैं तुम उनसे बँधे हुए हो, तब तक तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आएगी।” उपनिषदों में कामनाओं की बात नहीं है, पर मंत्रों में है, वहाँ सब कुछ कामनागत ही है। सब प्राकृतिक देवी, देवताओं से कहा जा रहा है हमारी ये कामना पूरी कर दो वो कामना, और कामनाएँ सारी वही हैं पुरानी कामनाएँ — बेटा दे दो, ज़मीन दे दो, हमारे पशुओं के ज़्यादा दूध आए और हमारे शत्रुओं को आग लगाकर के मार दो, यही हैं। ये लोकधर्म है। और वास्तविक धर्म — निष्कामता।
सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं?
सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं?
26 min
बहुतों को लगता है कि अगर ये सब हटा दिए नियम कायदे तो इंसान तो कुत्ता-बिल्ली बन जाएगा, नहीं बनेगा। तुम्हें क्या मनुष्यता पर भरोसा नहीं है? हमारे पास जब उच्चतम हो पाने की संभावना है तो तुम्हें क्यों डर लग रहा है कि हम कुत्ता-बिल्ली बन जाएँगे, क्यों डर लग रहा है? शिक्षा दो न उन्हें कि वो अपनी चेतना को बढ़ा पाएँ, उसी चेतना के बढ़ने से कृष्ण कहते हैं कि जो नहीं होना चाहिए फिर नहीं होता, संन्यास संयम सब आ जाते हैं जब आत्मज्ञान आ जाता है। तुम्हें क्यों लग रहा है कि लड़के-लड़कियाँ बिल्कुल वाहियात हो जाएँगे पागल हो जाएँगे हर जगह बस सेक्सुअल वायलेंस चल रहा होगा ये वो?
आदर्श, शिक्षित, सुसंस्कृत उत्तर भारतीय घर || आचार्य प्रशांत
आदर्श, शिक्षित, सुसंस्कृत उत्तर भारतीय घर || आचार्य प्रशांत
13 min

आचार्य प्रशांत: तो हमें बेटियों की चिन्ता हो रही है, होनी भी चाहिए। लेकिन बेटियों की चिन्ता का जो कारण आपके पास है, शायद बेटियों पर जो ख़तरा है वो किसी दूसरे कारण से है। जिस कारण से है, उसकी बात कर लेते हैं।

आप जब कहते हैं कि भारत

Sir, I Feel Addicted to You
Sir, I Feel Addicted to You
10 min
The ego seeks security from the world and even when it comes to the truth, it still wants to somehow uphold its security. It is all right if one wants to guarantee one's security against the world. But when it comes to truth and beauty, that's when one should just drop the defenses. It is all right to be immersed. It is all right even to be drowned. It is all right even to die. What is the point in conserving something that is anyway imperfect?
Abortion: many perspectives || Acharya Prashant, with BITS Pilani (2022)
Abortion: many perspectives || Acharya Prashant, with BITS Pilani (2022)
39 min

Questioner (Q): My question is regarding abortion. Broadly, there are two schools of thought regarding abortion. The first one is, because it is the woman’s body, she is the one who gets to decide whether to abort or deliver the child. The second school of thought says that the woman

हम झूठ के खिलाफ़ विरोध क्यों नहीं करते?
हम झूठ के खिलाफ़ विरोध क्यों नहीं करते?
12 min
हम कभी जीवन के तथ्य को स्वीकार नहीं करते कि हमें सत्य से डर लगता है और हम अपनी क्षुद्रताओं और झूठ पर जीना चाहते हैं। फिर हम बड़ी तिरछी चाल चलते हैं। झूठ को सत्य का नाम दे देते हैं और कहते हैं कि सत्य के समर्थन में हैं। सत्य के खिलाफ़ तो सारा संसार खड़ा है, लेकिन इतनी भी आबरू और हिम्मत नहीं होती कि हम खुलकर कह दें कि हम सत्य के खिलाफ़ हैं। हमने झूठ को ही सत्य का नाम दे रखा है और झूठ का समर्थन कर रहे हैं।