प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अब मैंने आध्यात्मिक शास्त्रों का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। जो मेरे सहपाठी हैं, वो मुझसे परेशान हो चुके हैं। वो हर कोशिश कर रहे हैं मुझे रोकने की कि तू अपने जो विषय हैं वो क्यों नहीं पढ़ता?
आचार्य प्रशांत: क्या पढ़ रहे हो अभी?
प्र: आयुर्वेद।
आचार्य: तो जब तुम बोध-साहित्य पढ़ते हो तो अपने दोस्तों के कमरे वगैरह में जाकर पढ़ते हो क्या?
प्र: एक ही कमरा है, तीनों साथ रहते हैं।
आचार्य: तो जब तुम पढ़ते हो तो ज़ोर-ज़ोर से बोलकर पाठ करते हो क्या? तो वो क्या करते हैं? वो आ-आकर देखते हैं कि तुम क्या पढ़ रहे हो?
प्र: हाँ, वो कोशिश करते हैं देखने की कि ये कर क्या रहा है। अब जैसे शान्त रहता हूँ तो वो कहते हैं कि कोई कमरे में चोरी कर जाए तो तेरे को तो पता ही नहीं लगेगा, तू खोया रहता है, थोड़ा ध्यान रखा कर इधर-उधर।




