सोशल एंग्ज़ायटी इसलिए है क्योंकि तुम्हारे पास जो है, वो बस सोशल ही सोशल है — सोशल मीडिया, सोशल इन्फ्लुएंसर्स, सोशल लाइफ़। ये जितने लोग जो तुम्हारे रोल मॉडल बने हैं, ये सब तुम्हें जीने के गलत तरीकों से लगातार भरे हुए हैं; उनको बर्ख़ास्त करो। अपने सामान्य ज्ञान को गहरा करो। विज़डम लिटरेचर और साधारण आध्यात्मिक कहानियों से होते हुए उपनिषदों तक पहुँचो। वो डर का आख़िरी इलाज है।
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प्रश्नकर्ता: रीवा से हैं, अमन चतुर्वेदी। डर का सामना कैसे करें? ये लगातार दिमाग में बना रहता है। भले ही मैं जाकर अपने डर का सामना करूँ, जैसा कि आपके वीडियो में बताया गया है, फिर भी हर बार अपने आप को असंतुलित पाता हूँ। मुझे हर बार किसी भयावह स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। मैं एक वर्ष से सोशल एंग्ज़ायटी में जी रहा हूँ। जीवन स्वस्थ है पर ये मानसिक असंतुलन दूर नहीं होता। ये कठिन है पर आदत बन चुकी है। मैं इससे बाहर निकलना चाहता हूँ।
आचार्य प्रशांत: इसमें जो ख़ास बात है, वो ये है कि डर बहुत रहता है। सोशल एंग्ज़ायटी रहती है और फ़ियर बहुत ज़्यादा है। बार-बार फ़ियर का ही अनुभव होता है। ख़ास बात ये है कि अठारह साल के हैं और अठारह साल में अमन ने ये महसूस किया है।
अमन, तुम भी वास्तव में पूछो तो दूसरों की करनी का फल भुगत रहे हो। तुम्हारी ये जो पूरी पीढ़ी है न, अठारह हो, टीनएजर हो, हम तो जब थे तब जेन एक्स ही बोल देते थे, अब तो जेन एक्स, जेन वाई, जेन ज़ेड ये सब पीछे छूट गया, ये तो मिलेनियल्स हो गए न ये लोग? खैर जो भी हो तुम, तुम्हें वास्तव में वो चीज़ दी ही नहीं गई है जो ज़िंदगी में पाने लायक है।




