
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आचार्य जी, मेरा नाम आर्या है और मेरा एक बहुत इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है। मैं अपनी बहन के साथ एक मूवी देखी, जो भूतिया था और उसका नाम एनाबेल कम्स होम था। तो उसमें एक डॉल रहती थी, जो भूतिया थी और वो हर किसी के भी घर में चली जाती थी और फिर पूरा घर भूतिया बन जाता था। और एक और एक मूवी था, जिसका नाम याद नहीं है, लेकिन उसमें एक “डिटेक्टिव* रहता था और वो बहुत पैरानॉर्मल डिटेक्टिव रहता था, पूरे इंडिया का सबसे पहला पैरानॉर्मल डिटेक्टिव, और फिर वो किसी भूतिया रहस्य में ही मर गया। तो आचार्य जी, ये जो मूवी देखती हूँ या सोचती हूँ, तो मेरे को बहुत डर लगता है। तो डर क्यों होता है? कैसे ख़त्म किया जाए?
आचार्य प्रशांत: बेटा, आप आपकी कितनी उम्र है? आप किस क्लास में हो?
प्रश्नकर्ता: फोर्थ में हूँ और मैं दस साल की हूँ।
आचार्य प्रशांत: आप फोर्थ में हो और दस साल की हो। मम्मी-पापा कहाँ हैं?
प्रश्नकर्ता: वहाँ हैं और दीदी भी वहाँ है।
आचार्य प्रशांत: आप उसको भूतिया पिक्चरें दिखाते हो?
प्रश्नकर्ता: नहीं, मैं बहुत साल से नहीं देखी थी, तो मेरे को लगा मैं नहीं डरती अब मैं देखूँगी। इसलिए मैं...
आचार्य प्रशांत: बेटा, भूत के बारे में क्या बोला जाता है? जो लोग कहते हैं भूत होता है, वो क्या बोलते हैं? भूत क्या है? कहाँ से आता है?
प्रश्नकर्ता: भूत आत्मा है, वो अलग जगह से आता है। घर में घुसता है।
आचार्य प्रशांत: अलग जगह माने कहाँ से आता है?
प्रश्नकर्ता: रहस्यमयी जगह।
आचार्य प्रशांत: रहस्यमयी जगह में कहाँ से गया वो? आपने इतनी पिक्चरें देखी हैं, तो उसमें कुछ दिखाते होंगे न, भूत कहाँ से निकला?
प्रश्नकर्ता: तो नहीं याद है।
आचार्य प्रशांत: अच्छा, यह तो दिखाते होंगे कहाँ घुस जाता है। कहाँ घुसता है?
प्रश्नकर्ता: वो किसी इंसान में भी घुस जाता है या कोई घर में घुस जाता है।
आचार्य प्रशांत: और दो-चार और देख लेना ऐसी भूतिया पिक्चरें। तो उसमें वो ये भी दिखा देंगे कि भूत निकलता कहाँ से? दिखाएँगे कब्र से निकला है। ठीक है? या कोई बिस्तर पर मर रहा है, तो उसके शरीर से निकला है। ये सब दिखाते हैं। ताबूत जानते हो, ताबूत?
प्रश्नकर्ता: नहीं।
आचार्य प्रशांत: जिसको ऐसे डाला जाता है ग्रेव में। है न? एक बॉक्स होता है न, जिसको ऐसे डालते हैं नीचे, कॉफिन। तो दिखाएँगे कि उसके अंदर से निकला। तो उसका एक ही आंसर है। ठीक है?
ये बॉडी है न, ये बॉडी है इसके अंदर कुछ नहीं जा सकता और न इसके बाहर कुछ आता है। यह बॉडी लगभग एक ईंट की तरह है। ईंट को तोड़ोगे, तो अंदर क्या मिलेगी? और ईंट ही जैसी चीज़ होगी, कोई। ईंट को तोड़ने पर भीतर कोई ख़ुफ़िया चीज़ तो मिलती नहीं, ईंट के भीतर ईंट होती है। मिट्टी के ढेले के भीतर मिट्टी होती है, मिट्टी का घड़ा बना दो तो उसके भीतर खाली जगह होती है। ऐसे ही यह जो शरीर है, इसके भीतर कोई ख़ुफ़िया चीज़ होती ही नहीं। न होती है, न इसमें जाती है, न इसमें से निकलती है।
पर इंसान को भूत बना-बना करके मज़ा आता है। क्यों? क्योंकि डरने में भी एक मज़ा होता है, तभी तो थ्रिलर पिक्चरें चलती हैं। हम ख़ुद को ही डराते हैं। कभी देखा है ये सब जो बड़े वाले झूले होते हैं? कभी करें वो, जो ऐसे गोल-गोल घूमता है, उसको क्या बोलते हैं?
प्रश्नकर्ता: वो याद नहीं।
आचार्य प्रशांत: हाँ। और भी बड़े-बड़े झूले होते हैं। कभी डिज़्नीलैंड वग़ैरह, इस तरह के जो होते हैं, वहाँ जाओ तो उनमें होते हैं न। तो उसमें देखा है, जो लोग बैठते हैं, वो क्या करते हैं?
प्रश्नकर्ता: वो चिल्लाते हैं।
आचार्य प्रशांत: वो चिल्लाते हैं। मानो उन्हें डर लग रहा है। लेकिन फिर भी वो पैसे देकर अपनी मर्ज़ी से उस झूले पर बैठने गए हैं। इसका मतलब क्या है?
हमें डरने में भी मज़ा आता है। इसलिए भूत की कहानियाँ चलाई जाती हैं। क्योंकि हम ऐसे अजीब लोग हैं और हमारी ज़िंदगी में असली मज़ा इतना कम है कि हम पैसे दे-देकर कहते हैं, कोई हमें डरा दो प्लीज़। थोड़ा तो मज़ा आए।
देखा है, लोग क्या करते हैं? पहाड़ पर जाकर कूद जाएँगे रस्सी बाँध के। कोई कुछ करेगा, कोई कुछ करेगा और यह सब करके उनको डर लगेगा और कर रहे हैं। क्यों कर रहे हैं? क्योंकि ज़िंदगी में थ्रिल इतनी कम है, असली थ्रिल। और ज़िंदगी में जॉय इतना कम है कि बेहूदा हरकतें करके ख़ुद को थ्रिल देनी है। जिसमें से एक हरकत यह भी है कि क्या? भूत है, भूत है। डर जाओ, डर जाओ, डर जाओ, डर जाओ।
प्रश्नकर्ता: और एक और क्वेश्चन है मेरा। जैसे ये भूतिया से ही रिलेटेड है। जैसे मेरा एक रूम है, एक मम्मी का है और एक मेरा और मेरी बहन का है। तो उसमें ही पूजा है, पूजा का रैक है। तो वहाँ एक फोटो है। तो जो वो फोटो है, वो मेरी नानी के वो लगते थे शिक्षक जैसे। तो पहले तो मैं उससे नहीं डरती थी, लेकिन फिर बाद में उससे भी बहुत डरने लगी मैं।
आचार्य प्रशांत: वो फोटो पहले ऐसी थी, फिर ऐसे हो गई न अचानक।
प्रश्नकर्ता: वो डर, वो मेरे मूड के हिसाब से उसका भी मुँह बदल जाता है।
आचार्य प्रशांत: उसका भी मुँह बदलता रहता है न?
प्रश्नकर्ता: बहुत डर लगता है उस रूम में।
आचार्य प्रशांत: और जब तुम खाती हो, तो फोटो ऐसे (जीभ बाहर निकालकर डराने का अभिनय करते हुए) करती है न?
प्रश्नकर्ता: मैं उस रूम में जाती नहीं हूँ, बहुत डर लगता है।
आचार्य प्रशांत: तो जितनी भी चीज़ें होती हैं न दुनिया में, वो सब उनके जो लॉज़ होते हैं, उनके हिसाब से काम करती हैं। किसी चीज़ के पास अपनी कोई विल होती ही नहीं है। तो फोटो के पास अपनी कोई विल नहीं है कि वो अपना मुँह बदल सके। अगर फोटो का मुँह बदल रहा है, तो इसका मतलब यह है कि उसमें दीमक लग गई होगी या उसमें पानी चढ़ गया। जब दीवारों पर सीलन उतरती है न, तो वहाँ फोटो टाँग रखी हो, तो फोटो ख़राब हो जाती है। फोटो ऐसे मुड़ जाती है, मुँह बदल गया। इसका मतलब ये नहीं, उसे भूत आ गया। इसका मतलब यही है कि उसके मटेरियल में कोई चेंज हो गया है।
भूत माने कोई ऐसी चीज़, जो हवाओं में तैर रही है, दिखाई नहीं देती। ऐसा कुछ होता नहीं है। क्योंकि भूत का ओरिजिन हम मानते हैं ह्यूमन बॉडी और ह्यूमन बॉडी के भीतर कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जो बॉडी से बाहर निकल के घूमने लग जाए। कुछ भी नहीं है, एकदम नहीं है। ठीक है?
और भूत की बात हम किस लिए करते हैं? भूलना नहीं। अगली बार जैसे ही भूत की बात हो, एक चीज़ याद कर लेना कि भूत की बात करके हमको क्या आते हैं? मज़े आते हैं। तो मज़ा जब करना ही है, तो कोई ढंग का मज़ा कर लें। अगर अपने आप को थ्रिल देनी ही है, तो कोई अच्छी सी स्ट्रगल कर लें। उसमें भी थ्रिल होती है। ये घटिया थ्रिल, चीप थ्रिल लेने में क्या मिलता है? कि भूत है, डायन है, वो मुझे खा जाएगी। ये चीप थ्रिल!है। है न?
और हॉरर की सामग्री पढ़ने से अच्छा है, नॉलेज की सामग्री पढ़ो। हॉरर मूवी से अच्छी कौन सी मूवी है? हिस्ट्री की मूवी, जिसमें हिस्ट्री बताई गई हो। है ना? वही देखा करो। और वो देखने के बाद, जब आप देखोगे हॉरर मूवी, तो उसमें मज़ा तो आएगा पर डरने का नहीं, हँसने का। भूत तुम्हें डरा रहा होगा और तुम कह रहे होगे, अच्छी कॉमेडी कर रहा है।
चैलेंज किया करो भूतों वग़ैरह को। अगर तुम सचमुच हो, तो यह मेरे सामने जो खाना रखा है, इसको खा के दिखाओ। यह पराठा अगर मैंने खा लिया, तो मैं हूँ और यह पराठा भूत ने खा लिया, तो भूत है। भूत को चैलेंज कर दो कि अगले 5 मिनट में यह पराठा जो खाए, वो है और फिर ख़ुद खा जाओ।