लड़कियों को बचपन से निर्भर बनाना उनकी क्षमता नहीं, उनकी स्वतंत्रता छीनता है। आर्थिक, बौद्धिक और व्यावहारिक आत्मनिर्भरता ही वास्तविक सम्मान और सुरक्षा का आधार है। समाज अक्सर उन्हें रूप, भावनाओं और दूसरों पर आश्रित रहने तक सीमित कर देता है, जबकि उनकी सबसे बड़ी आवश्यकता आज़ादी है। जो भी शिक्षा, कौशल या संघर्ष स्वतंत्रता की ओर ले जाए, उसी पर पूरी ऊर्जा लगानी चाहिए; बाकी सब उसके बाद है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा प्रश्न डिपेंडेंस के ऊपर था कि किस तरह लड़कियों को शुरुआत से पैंरेंट डिपेंडेंट बनाते हैं अपने ऊपर। इसका अगर मैं उदाहरण लूँ, तो मेरी बहन है, उसकी आज तक उससे टिकट नहीं बनती ट्रेन की। हमेशा मुझे बोला जाता है कि बना के दे दे। और है न, मैं नहीं बना हूँ, तो बोलते हैं कि कैसा भाई है।
और मैं इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हूँ। तो मैं गुड़गाँव में जॉब करता हूँ एमएनसी में। यहाँ भी मैं देख पा रहा हूँ कि कितनी ज़्यादा डिपेंडेंट हैं लड़कियाँ। मतलब छोटे-छोटे डिसीज़ंस के लिए भी अपने बॉयफ्रेंड के ऊपर, और मतलब उनको लोनली रहना पसंद ही नहीं होता। शुरुआत से मैं देख रहा हूँ कि मेरी एक एक्स भी थी, तो मतलब उसको हज़ार लड़के मैसेज भेजते थे दिन भर, मतलब इंस्टाग्राम पर या कैसे न कैसे करके। तो मैं देख पा रहा हूँ कि लोनली लड़कियाँ रहती नहीं हैं मेनली। और हमेशा बात करने में कोई होता है, तो सेल्फ-रिफ्लेक्शन जो होता है, वो होता नहीं है उनके अंदर। हमेशा दूसरे के ऊपर निर्भरता।




