ऋग्वेद का नासदीय-सूक्त — "सृष्टि से पहले क्या था?” सब कुछ अचानक कहाँ से प्रकट हो गया? फिर यही श्लोक आगे कहता है कि "ये बातें लगता है सिर्फ़ परमात्मा को पता होंगी," और आगे पूछता है, "लेकिन उसको भी पता है क्या?” भारत इसलिए महान है! जब बहुत आसान था डर और अज्ञान के कारण विश्वास कर लेना — भारत ने सवाल उठाए। भारत जानना चाहता था, बोध की तरफ़ बड़ा गहरा झुकाव था, इसलिए भारत महान है। भारत को महान कहने में अगर रुचि रखते हो, तो ख़ुद महान बनो — तुमसे ही है भारत की महानता।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम।
हम लोगों का देश के प्रति जो लगाव होता है, जो प्रेम होता है, और जैसा कि हम सब कहते भी हैं कि हमारा देश महान है, मुझे अपने देश के लिए ये करना है, वो करना है — सर्वप्रथम, आख़िर यह देश है क्या?
क्या हमारा देश, भारत, एक भौगोलिक क्षेत्रफल है, या 'भारत' मतलब कुछ और भी है? आख़िर ये भारत है क्या, मुझे समझाने की कृपा करें।
आचार्य प्रशांत: भारत क्या है ये इसपर निर्भर करता है कि तुम क्या हो। तुम अगर एक बंदर भर हो, तो भारत एक जंगल भर है; तुम मवेशी हो, तो भारत चारागाह है; तुम व्यक्ति हो अगर लेकिन राजनीति से भरे हुए, तो भारत एक राजनैतिक इकाई है, राज्यों का, प्रदेशों का संघ है। देखने वाले की दृष्टि पर निर्भर करता है भारत। लेकिन अगर शरीर होकर देख रहे हो भारत को, भारत तुम्हारी दृष्टि में विश्व के मानचित्र पर खिंची हुई कुछ लकीरों का नाम है, तो फिर ये बोलने का तुम्हें कोई हक नहीं है कि "भारत महान है।"




