अपने हिसाब से भगवान को आपने चुना, उसके बाद उम्मीद भी आपने ही लगाई कि अब ये मेरी कामना है, ये आप पूरी करो। और हम खुशामद करेंगे, पाँव पड़ेंगे, दूध चढ़ाएँगे, तो वो प्रसन्न हो जाएगा और हमारी डिज़ायर्स पूरी करेगा। भगवान को इन चीज़ों से क्या मतलब है? भगवान माने सत्य; जो पहले ही पूर्ण है, वो आपका पैसा लेकर क्या करेगा? जो आप चढ़ा रहे हो, किसी की जेब में तो जा रहा है न। जिसकी जेब में जा रहा है, उसी का स्वार्थ है और उसी ने सारी गड़बड़ फैलाई है।
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प्रश्नकर्ता: आप भक्ति में जुड़ जाते हैं, उसके बाद प्रॉब्लम ये होती है कि आप एकदम वीक लेवल पर चले जाते हो और फिर उसके बाद आप काफ़ी इमोशनल हो जाते हो। आपकी एक्सपेक्टेशन ही बढ़ जाती है, क्यों? क्योंकि भगवान है। बट सर, फिर लाइफ़ में कुछ ऐसे मोमेंट्स आते हैं जहाँ पर आपको सब कुछ नहीं मिलता, आप जो चाह रहे हो और कहीं-न-कहीं मेंटली आप डिप्रेस्ड हो जाते हैं।
फिर सर, कुछ लोग आते हैं जो न्यूमरोलॉजी, एस्ट्रोलॉजी ऐण्ड ऑल। तो सर, मैं जानना चाहती हूँ कि ये सब क्या है? मतलब, भक्ति करना, उस पर विश्वास करना, फिर उसका हर्ट होना। मतलब मैं कंफ्यूज़ हूँ।
आचार्य प्रशांत: भगवान ने कहा था क्या, कि मैं तुम्हारी उम्मीदें पूरी करूँगा? तो फिर भगवान को क्यों दोष दे रहे हैं आप। आप कोई उम्मीद बना लेते हो, वो भी अपनी पसंद की सत्ता से। ठीक है न?




