किसी महिला को पढ़ाई, नौकरी, खेल से वंचित कर दिया गया, यह अत्याचार नहीं है क्या? पर इन अत्याचारों को तो हम अत्याचार मानते ही नहीं। चूँकि हमने महिला की पूरी आइडेंटिटी को उसकी सेक्सुअलिटी से ही बाँध दिया है। उसी का नतीजा यह होता है कि कहीं पर भी दंगा-फसाद हो, उसमें महिलाओं का बलात्कार अक्सर देखने को मिलता है। लेकिन महिला सिर्फ अपने जेंडर या सेक्स से तो आइडेंटिफाइड नहीं होती न! हमें उसके व्यक्तित्व के बाकी आयामों को भी सम्मान देना सीखना होगा।
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आचार्य प्रशांत: देखिए दो-ती महीने हो गए हैं मणिपुर में जो संघर्ष चल रहा है। भारत को कोई बहुत फर्क नहीं पड़ रहा था। ज्यादातर लोगों के कान में जूं नहीं रेंग रही थी। हम कह रहे थे छोटा सा राज्य उधर उत्तर पूर्व में मीडिया भी उसको बहुत कवरेज नहीं दे रहा था और आम आदमी को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। अब कुछ तस्वीरें सामने आई हैं और वो भी पुरानी हैं। कोई आज की नहीं है। एक दो महीने पुरानी तस्वीरें हैं और और बड़ी व्यथित करने वाली तस्वीरें हैं। उसमें कोई महिला है और उसके साथ बड़ा पार्शविक और बड़ा अभद्र व्यवहार करा जा रहा है यौन शोषण और अब शोर मच रहा है और आज ही पता चला है कि वो अब वो कोई अकेला मामला नहीं था। वैसे और भी कई सारे वहां मामले थे और कुछ और भी तस्वीरें हैं जो अब दिखाई दे रही हैं। और अब देश जो है वह हरकत में आ रहा है। सनसनी फैल रही है बिल्कुल। जिस कारण से सनसनी फैल रही है ना उसी कारण से उन महिलाओं के साथ वो दुर्व्यवहार करा गया। और दुर्व्यवहार ही नहीं है अगर मैंने ठीक से पढ़ा है तो बाद में उनकी हत्या भी करी गई है, मार ही डाला।
हमारे लिए औरत में उसकी सेक्सुअलिटी ही बहुत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए- एक लड़की का बाप है। उसकी लड़की जवान है और कोई लड़का कोई ऐसी वजह पैदा कर देता है कि उस उस लड़की के परीक्षा में कुछ अंक कम हो जाते हैं तो उसके पिता को बहुत अंतर नहीं पड़ेगा। उस लड़के ने दुर्भावनावश उस लड़की के नंबर कम करा दिए एग्जाम में तो बाप को बहुत अंतर नहीं पड़ेगा। लेकिन वही लड़का लड़की को छेड़ दे, उसकी बेटी को छेड़ दे तो बाप को बहुत फर्क पड़ जाता है।




