प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, आज सुबह से थोड़ा मैं परेशान था इसलिए मैं चाहता था मैं आपसे थोड़ा बात करूँ इस विषय में। मेरा एक दोस्त है उसका मुझे सुबह फ़ोन आया था और सुबह जो उसका फ़ोन आया था उसके पीछे थोड़ा बैकग्राउंड (पृष्ठभूमि) है वो बताना चाहूँगा पहले।
उसका ऐसे ही मेरे पास दो या तीन महीने पहले भी फ़ोन आया था उस वक़्त बहुत परेशान था, रो रहा था और मैंने उससे वजह पूछी कि इतना परेशान क्यों है। तो उसने मुझे वजह बतायी कि उसका एक स्टॉक पोर्टफ़ोलिओ था या उसने कुछ पैसे जो थे अपने जो भी उसकी सेविंग्स (बचत) थीं वो कुछ जगहों पर इन्वेस्ट (निवेश) कर रखी थीं। मैंने जानना चाहा कि ये उसने ऐसा क्यों किया है, कुछ भी, तो मुझे पता चला कि वो कुछ यूट्यूब पर वीडियोज़ वगैरह देखता है और वहाँ पर उसने कुछ कोर्स (पाठ्यक्रम) वगैरह कुछ करा। स्टॉक मार्केट (शेयर बाज़ार) का, एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमशीलता) का ये वो। कहीं से उसे पता चला इन-इन चीज़ों पर उसको इन्वेस्ट करना चाहिए। फिर उससे फ़ायदा होता है पैसे बनते हैं और जल्दी अमीर बन सकते हो।
तो इसी आस में उसने कहीं पैसे वगैरह लगाये थे और उस दिन जब उसने मुझे फ़ोन किया तो उसके सारे पैसे डूब चुके थे। तो उस वक़्त परेशान था समझना चाहता था पूछ रहा था कि मैं क्या करूँ, कैसे हुआ; और ये सब बातें। और मुझे ख़ुद भी पता है कि वो एक बहुत एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। वो मेरा बचपन से दोस्त रहा है मैंने उसे बचपन से देखा है। उसकी घर की हालत कैसी रहती है।
तो मुझे ये भी पता था कि उसने जो अपना पैसा यदि गँवाया है तो वो भी उसके लिए बहुत बड़ी बात है। उस समय मैंने उसे समझाया, बात की, सान्त्वना दिया, समझ गया। आज सुबह उसका जब फ़ोन आया इस बार वो बहुत खुश था और मैंने बात-वात थोड़ी बहुत करी तो मुझे पता चला कि अब उसने इस बार कोई नया व्यक्ति है जिसको उसने फ़ॉलो (अनुसरण) करना शुरू कर दिया है यूट्यूब और सोशल मीडिया पर।




