जिनके पास कुछ करने को नहीं है, वो कुछ तो करने की कल्पना करेंगे न। अब आदमी को पता नहीं होता कि सूनापन चीज़ क्या है; वो पैदा कहाँ से हो रहा है। तो उसको भरने के लिए फिर तरह-तरह की कोशिशें करता है, अपनी स्थिति अनुसार। आप स्त्री हो, तो डिमांड पुरुष की करोगे; आप पुरुष हो, तो स्त्री की करोगे। आप ग़रीब हो, तो पैसे की करोगे। ऐसा लगेगा कि अलग-अलग चीज़ों की डिमांड हो रही है। पर वो जो आपकी डिमांड है, माने डिज़ायर है, वो वास्तव में आ रही है एक ही जगह से, वह है हमारा अस्तित्वगत अज्ञान, उसी को अहंकार बोलते हैं।
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प्रश्नकर्ता: गुड ईवनिंग, सर। सर, देयर इज़ वन चैप्टर, “सेक्स इज़न्ट द प्रॉब्लम, एम्प्टिनेस इज़” (ट्रुथ विदाउट अपॉलजी पुस्तक से)। विच सेज़, ग्रेट सेक्सुअल अर्ज इज़ ऐन इंडिकेटर ऑफ ग्रेट इनर एनर्जी वेटिंग टू फाइंड द राइट डायरेक्शन। गिव इट द राइट डायरेक्शन। सो, हाउ टू गिव इट द राइट डायरेक्शन; दिस इनर एनर्जी? आई ऐम फेलिंग इन दैट।
आचार्य प्रशांत: बेटा, जिनके पास कुछ करने को नहीं है, वो कुछ तो करने की कल्पना करेंगे न, या अरमान जगाएँगे। आप यहाँ बैठे हो, आप सेक्स पर सवाल कर रहे हो। यहाँ मान लीजिए जो हवसी से हवसी आदमी भी मौजूद हो, वो इस वक़्त तो सेक्स की नहीं सोच रहा होगा, या सोच रहा होगा? क्योंकि एम्प्टिनेस नहीं है न अभी। अभी एक उद्देश्य मिला हुआ है, भले ही वो उद्देश्य इस माहौल की पैदाइश हो, भले ही वो उद्देश्य क्षणिक हो। कि ये माहौल बीतेगा और उसके बाद आप पाओगे कि आप फिर रूखे रह गए, या अकेले रह गए, या अभी तक फिर सूनापन खड़ा हो गया है।
अब आदमी को पता नहीं होता कि वो सूनापन चीज़ क्या है; वो पैदा कहाँ से हो रहा है। तो उसको भरने के लिए फिर तरह-तरह की कोशिशें करता है अपनी स्थिति अनुसार।




