भारत के सारे जवान लोगों का अब यही नारा है: कुछ और न आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है। प्रेम हल्की बात नहीं होती है, भाई! एक तरीके से प्रेमी बनने का अर्थ होता है चिकित्सक बनना; जिससे प्रेम करते हो, तुम्हारे ऊपर उसके सुधार और स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी आ जाती है। प्यार ऐसी चीज़ है, जिससे बच भी नहीं सकते, लेकिन बिना पात्रता के किया, तो फिर तुम्हें कोई बचा भी नहीं सकता। करना तो पड़ेगा ही, लेकिन बिना समझ-बूझ कर करा, तो फिर वो प्यार नहीं है, वो अत्याचार है।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी! मेरा सवाल रिलेशनशिप्स को लेकर है और शादी को लेकर है, और मतलब संबंधों को लेकर के बहुत कनफ्यूज़ हो गया हूँ लाइफ़ में। पहले एक अभी रिलेशनशिप में था, कई सालों से। उसमें एक-दूसरे की हम मदद भी करते थे बहुत, जो एक ज़िंदगी को बेहतर बनाने वाली चीज़ होती है। लेकिन कॉन्फ्लिक्ट भी बहुत ज़्यादा रहता था। और अब ये चीज़ लगती है क्योंकि अब मेरी जो ऐज है इस पर मुझे थोड़ा प्रेशर भी फ़ील होता है। और जिस साथी के साथ था उसकी तरफ़ से भी प्रेशर फ़ील होता है कुछ डिसीज़न लेने का।
और अब क्योंकि मैं पिछले दो सालों से अपनी लाइफ़ को लेकर के बहुत मतलब डेडिकेटेड हो गया हूँ, कि मेरे जो-जो भी मुझे कष्ट लगते हैं वो मुझे हटाने हैं। तो अब मुझे लगता है कि अगर कोई भी व्यक्ति बहुत ईमानदारी से अपने कष्टों पर काम करेगा तो उसको जो चैलेंजेज़ उस समय फ़ेस करने हैं, वो दूसरे व्यक्ति से काफ़ी अलग हो सकते हैं। और शादी के रिश्ते का मतलब, जो हमारी सोसाइटी में एक कॉन्ट्रैक्ट है, जीवन भर का साथ है, कुछ उस कॉन्ट्रैक्ट में एक्सपेक्टेशन्स




