‘आइ लव यू' कहने के लिए पहले ‘आइ’ को जानना होगा | तुम ठीक हो जाओ उसके बाद सामने वाले के दस चेहरे तुम्हारे लिए समस्या नहीं रह जाऍंगे। अभी तुम्हें उसके दस चहरों से इसलिए समस्या हो रही है क्योंकि तुम्हारे भी अपने दस चेहरे हैं। ‘आइ’ की, ‘मैं’ की, ‘अहम्’ की, अपनी बात हम नहीं करना चाहते। |‘यू’ ऐसे है, ‘यू’ ऐसे है, प्रेम ऐसा है। अरे वो ‘यू’ तो बहुत-बहुत बाद में आता है, शुरुआत किससे होती है? ‘आइ’ से। इस ‘आइ’ को ठीक करो पहले।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आज पता चला है कि प्यार तो उसी से हुआ है जिसके दस चेहरे हैं, और उनके दस मालिक। हाॅं, ये भी समझ आ रहा है कि हमारे भी दस चहरे हैं। पर क्या फिर हम सामने वाले को छोड़ दें? क्योंकि सामने वाला हमारे दस चेहरों की निन्दा करते हुए हमें छोड़कर चला गया है। उससे प्रेम भी नहीं है, क्या उसे वापस लायें?
आचार्य प्रशांत: आप हो कहाँ प्यार करने के लिए? सारी बातचीत सामने वाले के बारे में कर रहे हो जिसके दस चेहरे हैं, दस मालिक हैं, वो जो छोड़कर चला गया है। अपनी भी तो बात बताओ न, आप हो कहाँ? प्यार करने के लिए कोई चाहिए कि नहीं चाहिए? कोई होगा तब न प्यार करेगा।
कॉलेज के दिनों में था मैं, आयनरैंड को पढ़ा था। तो फिर याद करता हूँ, बिस्तर पर लेटकर अपना पढ़ रहा था फाउंटेनहेड। तभी एक उसमें वाक्य सामने आया, और मैं बिस्तर पर लेटा था एकदम ऐसे सीधे उठकर बैठ गया (उठकर बैठने का इशारा करते हुए)। उसमें लिखा था, ‘टू से आइ लव यू वन मस्ट फर्स्ट नो द आइ (यह कहने के लिए कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, पहले ‘मैं’ को जानना होगा)। ‘आइ लव यू’ तो ‘आइ’ से शुरू होता है। ‘आइ’ है कहाँ तुम्हारे पास? ‘आइ’ है कि आइ लव यू बोलने निकल पड़े? और सारी बातचीत किसके बारे में कर रहे हो, ‘यू’ के बारे में। ‘यू’ ऐसे है, ‘यू’ ऐसे है, प्रेम ऐसा है। अरे वो ‘यू’ तो बहुत-बहुत बाद में आता है, शुरुआत किससे होती है? ‘आइ’ से। वर्णमाला ‘ए’ से नहीं शुरू होती, ‘आइ’ से शुरू होती है।




