


प्रश्नकर्ता: ब्रह्मचर्य और विवाह में क्या सम्बन्ध है? जो भी जितने भी ब्रह्मचारी लोग हुए हैं, उनके जीवन को पढ़ते हुए बड़ा आनन्द आता है। मतलब जो ब्रह्मचर्य के नियम पर चले हैं। जैसे– स्वामी दयानन्द हो गए, महात्मा बुद्ध हो गए, भगवान महावीर हो गए या स्वामी विवेकानन्द हो…
कॉन्शियसनेस…
व्याधिस्त्यानसंशयप्रमादालस्याविरतिभ्रान्तिदर्शनालब्धभूमिकत्वानवस्थितत्वानिचित्तविक्षेपास्तेऽन्तरायाः॥१.३०॥
व्याधि, सत्यान, संशय, प्रमाद, आलस्य, अविरति, भ्रान्ति दर्शन, अलब्ध, भूमिकत्व, अनवास्थितत्व, ये नौ जो कि चित्त के विक्षेप हैं। वे ही विघ्न हैं।
~ समाधि पाद, पतंजलि योग सूत्र
प्रश्न: आचार्य जी, नमन। संशय, प्रमाद, और आलस्य में क्या सम्बन्ध है? मैं हमेशा संशय में रहता हूँ। मुझे,…
Yoga is action without attachment. Yoga is to refuse everything that keeps you little and limited. To live without a reason, to love without a cause, to act without greed and desire, that is Yoga. Total purposelessness is Yoga. Yoga is freedom from all whys.

15 नवंबर को गीता सत्र से कुछ घंटे पहले, देश की बड़ी पशु कार्यकर्ता, गौरी मौलेखी जी का एक संदेश आया। उन्होंने आचार्य जी से नेपाल में होने वाले ‘गढ़ीमाई महोत्सव’ के विषय पर बिहार के, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रेस से बातचीत के लिए पटना आने का अनुरोध किया। यह एक गंभीर मुद्दा था—हजारों जानवरों की जान बचाने का और एक सदियों पुरानी कुप्रथा के विरुद्ध आवाज़ उठाने का।

On the evening of November 15, just hours before a scheduled Gita session, a message arrived from Gauri Maulekhi, a prominent animal rights activist. She requested Acharya Prashant to join her in Patna the following morning to meet the Chief Secretary of Bihar and address the press about the Gadhimai festival in Nepal. This was no ordinary request. It was a plea to save thousands of animals and to raise a voice against a centuries-old practice of cruelty disguised as tradition.

🔥 “मैं तुम्हें प्यार से लूटने आया हूँ” 🔥
देश को आज़ाद हुए 4 साल ही हुए थे, और 75% आबादी कृषि संबंधित कार्यों से जीवनयापन कर रही थी।
लेकिन एक बहुत विचित्र बात थी: कृषि क्षेत्र में काम कर रहे अधिकतर लोगों के पास अपनी ज़मीन ही नहीं…

How many hours do you spend meditating each day?
This is a trick question!
Whether you are “meditating” one hour per day or six, you are not truly meditating. This is because meditation is not something you do to escape life. Meditation is a way of life.
Meditation is to…

नवरात्रि में हम देवी की पूजा करते हैं और महिषासुर को बाहर का कोई दैत्य मान लेते हैं। पर दुर्गा सप्तशती का दूसरा चरित्र हमारी अपनी वृत्ति की कथा है। जो मन प्रकृति को केवल भोगने की वस्तु मानता है, जंगल काटता है, नदियाँ दूषित करता है, पशुओं को खाता है और कहता रहता है कि मुझे और चाहिए, वही महिषासुर है। त्यौहार उसी के वध के लिए है, उसे भोग लगाने के लिए नहीं। क्या इस नवरात्रि हम अपने भीतर के महिषासुर को पहचानेंगे?

नवरात्रि आते ही हम सोचने लगते हैं कि क्या खाना है, क्या नहीं खाना, कौन-सा हवन करना है। पर व्रत का अर्थ है संकल्प, और शुभ संकल्प एक ही है: हम जैसे हैं, वैसे न रहें। इसीलिए ये नौ दिन दुर्गा सप्तशती को समझने के लिए हैं, केवल रस्मों के लिए नहीं। जिसे हम माँ कहते हैं, वह यह पूरी प्रकृति है, और उसके ही बच्चों को चोट पहुँचाकर उसका पर्व नहीं मनाया जा सकता। क्या इस बार हम नौ दिन अपने ही जीवन को ईमानदारी से देख पाएँगे?

संसार में तुम जिस भी चीज़ को शांति का,तृप्ति का साधन बनाओगे वो चीज़ बेचारी असफल हो जाएगी। तुम उसे भोगकर के कुछ और कर देते हो। तो फिर कौन है जो तुम्हें सन्तुष्टि दे सकता है? सिर्फ़ वो जो तुम्हारे स्पर्श से कहीं आगे का हो। तुम्हारा स्पर्श उस पर कोई दाग ही न लगा पाये, जो अस्पर्श्य हो। ऐसे किसी को ही सत्य कहा गया है, परमात्मा कहा गया है। वो तुम्हारे काम का है क्योंकि तुम उस पर हावी नहीं हो सकते। वो तुम्हारे काम का है क्योंकि तुम उसे बदल नहीं सकते।

प्रश्नकर्ता: आत्मा और अहंकार ये सारी इंटेलेक्चुअल लेवल (बौद्धिक स्तर) पर समझ में आती हैं। लेकिन अनुभव के स्तर पर कहीं-न-कहीं हम इनको एक तरीक़े से मान रहे हैं, जान नहीं पा रहे अन्दर से कि हम आत्मा हैं। ये परिवर्तन कैसे हो?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं समझना होता, जीना…

Questioner: Namskar Acharya ji. Pardon me for not remembering exactly but in one of the shivirs where we had read ‘Gospel of Sri Ramakrishna’ to come to terms with this expression called ‘Adhikar Bhed.’
So therein Ramakrishna was saying that, “now in modern times there cannot be any Adhikar Bhed,…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अष्टावक्र कहते हैं कि ध्यान की विधियाँ बंधन हैं। मेरी जिज्ञासा यह है कि इतनी सारी ध्यान की विधियाँ क्यों हैं?
आचार्य प्रशांत: विधियाँ उनके लिए हैं जिन्हें सत्य को तो पाना है और अपनी ज़िद को भी बचाना है। ख़ुदा को भी पाना है ख़ुद को…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई सालों से अध्यात्म के साथ हूंँ, लेकिन फिर भी एक खालीपन महसूस होता रहता है, इससे बाहर कैसे निकलूंँ? कृपया मार्गदर्शन कीजिए।
आचार्य प्रशांत: मैं आपको इतना बताए देता हूंँ कि खेल बिलकुल आपके हाथ में है। बात यहांँ ग्रह-नक्षत्रों, चांँद-तारों की बिलकुल नहीं है कि…

प्रश्नकर्ता: एक चीज़ होती है मेंटल एजिलिटी (मानसिक चपलता), जैसे कि मैं कहीं बाइक से जा रहा हूँ और अचानक कोई मोड़ आ गया या एक कुत्ता बीच सड़क पर आ गया, तो मुझे एकदम से ब्रेक लगाने की आवश्यकता पड़ी। तो ये जो स्किल (कौशल) होती है एकदम से …

प्रश्नकर्ता: अगले प्रश्नकर्ता आपके साथ गोवा शिविर में भी थे और वहीं से ही वे उद्धृत करते हैं। आपने कहा था, ‘आदमी वास्तव में जान जाए उनके ऊपर कौन है। तो आगे लिखते हैं कि आचार्य जी, इस बात को मैं कैसे समझूँ और जान पाऊँ कि ज़िन्दगी निजी भोग…

प्रश्नकर्ता: धन्यवाद आचार्य प्रशांत जी! हमारे लिए समय निकालने के लिए। अभी जैसे हम लोग देख रहे हैं कि कोरोना काल चल रहा है और जीवन का भी काफ़ी लॉस (हानि) हुआ है, जीवनी का भी काफ़ी लॉस हुआ है। ये क्या एक कलेक्टिव मॉर्निंग (सामूहिक शोक) जो हो रही…

प्रश्नकर्ता: मन क्यों हमेशा सुरक्षा की तलाश में लगा रहता है? क्या हैं मन के सदा असुरक्षित अनुभव करने के कारण? मैं तो अध्यात्म में, आप में और शिविर इत्यादि में भी सुरक्षा की तलाश कर रहा हूँ कि संसार में सुरक्षा न मिली तो सत्य में मिल जाए। मैं…

जीवन में जो भी तुम्हें ऊँचे-से-ऊँचे अनुभव हों, उनको एक सीमा से ज़्यादा गम्भीरता से नहीं लेना चाहिए। और जो लोग सच्चाई के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं उनको थोड़े अलग तरह के अनुभव होने शुरू हो जाते हैं, इससे मैं सहमत हूँ। और वो अनुभव आपको तभी नहीं होते…

प्रश्नकर्ता: मेरा शरीर यादों से भरा हुआ है। यहाँ तक कि मैं अपने बालों के रंग, अपनी आँखों के रंग को भी स्मृति ही कहूँगा। और ये स्मृतियाँ मुझे पुरानी पीढ़ियों से मिली हैं क़रीब-क़रीब विरासत के तौर पर।
तो हम इन मेमोरीज़ को, स्मृतियों को फॉरमैट कैसे कर सकते…

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर, हाल ही में मैंने अपने आदर्श स्टीव जॉब्स और विराट कोहली द्वारा सुझाई गयी लोकप्रिय किताब ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ पढ़ी, तो जीवन का अलग ही आयाम खुल गया।
उस किताब के लेखक और उनके गुरु ने, न केवल अपने पूर्व जन्मों के बारे में विस्तार से…

प्रश्नकर्ता: स्त्री की सुंदरता से उसकी कोमलता का जो एहसास होता है, क्या वो परमात्मा की कोमलता जैसा होता है?
आचार्य प्रशांत: रोमेंटिक उपन्यास पढ़ रहे हो? हमें तो पता था सत्यम-शिवम्-सुंदरम, स्त्री कब से सुन्दर होने लग गई? सत्य सुन्दर होता है। स्त्री-पुरुष कब से सुन्दर हुए? कोमलता माने…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी मेरे मन में जो है सैक्स (यौन क्रिया) से सम्बन्धित बहुत विचार आते हैं तो उन्हें कैसे कम या नियन्त्रित कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: ज़िन्दगी यूँ ही छोटी है, उसमें किसी ऐसे काम के लिए तुम समय कहाँ से निकाल रहे हो, जो तुमको पता है…

आचार्य प्रशांत: अगर एक बच्चा पैदा होता है तो वो औसतन अपने जीवनकाल में प्रतिवर्ष अट्ठावन टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन करेगा। आज की जो स्थिति है, आज के जो ट्रेंड (प्रचलन) हैं उसके हिसाब से। उसकी तुलना में अगर आप कार्बन डायऑक्साइड कम करने के दूसरे तरीक़े लगाते हैं,…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा प्रश्न विज्ञान से सम्बन्धित है। तो काफ़ी समय से वैज्ञानिक समुदाय और प्रकृति में एक तरीक़े का एक तकरार चल रहा है और काफ़ी हद तक विज्ञान सफल भी हुआ है, कोविड वैक्सीन का उन्होंने निर्माण किया और शायद प्रकृति की जो योजना थी उसको…

आचार्य प्रशांत: ध्यान की एक विधि। उत्सुकता आयी थी कि ध्यान की एक विधि दी जाए। तो आपमें से जो लोग उसके बारे में जानना चाहें, वो समझें।
शून्य-स्मरण। शून्य-स्मरण – जो कुछ भी बहुत आवश्यक और ज़रूरी लगता हो, जो कुछ भी नितांत क़रीबी, आवश्यक प्रतीत होता हो, उसको…

Acharya Prashant: Desire means that you are not alright with yourself and you want something else to happen, correct? So, we are anyway not living for ourselves. We are rather living to change ourselves. And are these not two very different things? If you are living for yourself as you…

Acharya Prashant: The spiritual soldier, the religious warrior has to be extremely intelligent. You could go to the extent of saying that he has to be cunning in the service of Truth; I’m choosing this word with all deliberation.
He has to be cunning in the service of the Truth;…

आचार्य प्रशांत: अगर हमारे बीच वास्तव में कोई रिश्ता है तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगा कि आप वैसे ही कोई ज़िन्दगी जी रहे हो जैसे कोई आम आदमी जीता है। मुझे अपनेआप पर और अपनी बात पर घिन आएगी। आप अगर कहते हो आप दो साल से मेरे साथ…

प्रश्नकर्ता: सबको प्रणाम। आज की इस धर्म चर्चा में आपका स्वागत है। आज हमारे बीच में एक ऐसी विभूति या कहें शख्सियत आचार्य प्रशांत जी हैं। आपके बारे में मैं थोड़ा सा बताना चाहूँगा। आप बहुत ही ज्ञानी और पढ़े-लिखे एक आचार्य हैं। इन्होंने आइआइटी से इंजीनियरिंग की, आइआइएम से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आप हमेशा बोलते हैं कि ऊँचे उद्देश्य रखने चाहिए जिससे कि उसमें किसी भी तरीक़े का कोई डेविएशन नहीं होता है। अब ऊँचे उद्देश्य रखने की सामर्थ्य और साहस नहीं मिल पाता है क्योंकि अपनेआप को बहुत जगह मैं बेहोश पाता हूँ। कभी कुछ चीज़े साफ़…

प्रश्नकर्ता: साक्षी भाव के लिए ध्यान की आवश्यकता है?
आचार्य प्रशांत: साक्षी भाव और ध्यान एक ही बात है। ध्यान साक्षित्व का माध्यम नहीं है। थोड़ा समझेंगे, ध्याता हम सब सदा हैं, ऐसा नहीं कि जब आप कुछ विशिष्ट पलों में ध्यान लगाने बैठते हो तभी आप ध्यानी होते हो।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न मेरे वैवाहिक जीवन से है। किसी भी अन्य रिश्ते में मुझे अभिव्यक्ति करना सरल लगता है पर अपनी बातें अपनी पत्नी तक पहुँचाना बहुत ही कठिन लगता है। यह रिश्ता इतना गहरा है फिर इतनी मुश्किल क्यों?
आचार्य प्रशांत: अब तुम्हें यहाँ पर एक…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। आपका एक वीडियो था, वो अभी हाल ही में आया था और उसको कई सारे साथियों ने देखा। और मैं उस वीडियो के कमेंट्स को पढ़ रहा था तो मैंने वहाँ पर देखा कि कई सारी जिज्ञासाएँ थीं, लोगों के सवाल थे, जो मुझे वहाँ मिले और…

प्रश्नकर्ता: जो अभी जिज्ञासा है मेरी आचार्य जी, यूट्यूब पर एक शॉर्ट्स देखा था, उसके सम्बन्ध में है। तो एक बहुत सुप्रसिद्ध व्यक्ति जो श्रीमद्भगवद्गीता पर बोलते हैं उनका वह शॉर्ट्स देखा था; काफ़ी चल रहा है, बार-बार मेरे फीड पर आया। तो वो निष्काम कर्म पर बोल रहे थे…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। आचार्य जी, पिछले एक साल से आपको सुन रहा हूँ और आपकी अनुकम्पा से ग्रन्थ भी पढ़ने शुरू किये हैं तो अभी प्रतिदिन कुछ नया सीखने को मिलता है, मन बिलकुल लगा रहता है और जैसा पहले चला करता था, उससे बिलकुल बदल गया है जीवन।…

प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते। आपसे मैं सर्वप्रथम शास्त्र-कौमुदी नामक कोर्स (पाठ्यक्रम) के जरिए जुड़ा था, तब से मुझे वेदांत और ग्रंथों का मूल्य पता चला। मैंने प्रस्थानत्रयी का पाठ शुरू किया है, तीन महीने हो गए हैं। मुश्किल हो रही है समझने में, पर आनंद आता है। कोरोना के कारण घर…

द सॉन्ग ऑफ द टवेल्व डिसेप्शंस। वर्ल्डली अफेयर्स आर ऑल डिसेप्टिव; सो आई सीक द ट्रुथ डिवाइन।
"संसार के सभी क्रियाकलाप तो मायारूपी हैं, अतः मैं सत्य की शरण में जाता हूँ।"
आचार्य प्रशांत: शुरुआत हमेशा वहीं से होती है—जो तुमने कहा न मैं जानवर हूँ—ये जानने से। शुरुआत वहीं…

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पांडव। न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन।।
~ श्रीमद्भगवद्गीता, छठा अध्याय, दूसरा श्लोक।
जिसको संन्यास कहते हैं उसको तू योग जान क्योंकि संकल्पों का त्याग न करने वाला कोई भी व्यक्ति योगी नहीं होता।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। मैं संकल्पों के त्याग का तात्पर्य समझना चाहता…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक ही चीज़ का लम्बे समय तक सॉल्यूशन (हल) नहीं मिल पाता। जैसे मान लीजिए कि कोई मानसिक समस्या है, उसमें काफ़ी समय बीत गया और उस पर मनन-मंथन भी काफ़ी हुआ, लेकिन उससे उबर नहीं पाये हम, उससे…

आचार्य प्रशांत डिप्रेशन तब तक नहीं हो सकता जब तक अपनेआप को बहुत मजबूर अनुभव न करो। और मजबूर हम नहीं होते, मजबूर हमें हमारी अन्धी कामनाएँ बनाती हैं। अन्यथा कोई मजबूर नहीं है। कामनाओं में भी कोई दिक्क़त नहीं है, अगर वो अन्धी न हों। जो कामना आपको अन्धेरे…

प्रश्नकर्ता: सत्य और अध्यात्म की बात पर। व्हाट इस द डिफरेंस बिटवीन बींग स्पिरिचुअल एंड हैविंग अ स्पिरिचुअल एक्सपीरिएंस (आध्यात्मिक होने में और आध्यात्मिक अनुभव होने में क्या अंतर है) ?
आचार्य प्रशांत: आध्यात्मिक अनुभव जैसा कुछ नहीं होता। आप अगर आध्यात्मिक हैं तो आपके सब अनुभवों में एक सच्चाई…

Acharya Prashant: A quiver full of the best of arrows but no bow, how do you fight the battle of life? Can you imagine the amusing as well as tragic situation of the person who has a great arrow without a bow? He will be sharpening and sharpening his weapon,…

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी।…

प्रश्नकर्ता आचार्य जी, जब मैं पशु-वध के तथ्यों को देखता हूँ तो मुझे यह उम्मीद होती है कि पढ़े लिखे लोग भी इसे समझेंगे, लेकिन जब हमारे देश में कुछ समय पहले गाय के माँस पर रोक लगाने की बात की जा रही थी तो यही उच्च-मध्यम वर्गीय और पढ़े…

n some sense, spirituality is all about unleashing yourself, which is freedom from bondage. The leash is the bondage. Read more....

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न है कि हमारे सामने जब कोई परिस्थिति आती है तो हम उसके तथ्य को देखने के बजाय, उसे उसके अतीत से जोड़कर देखते हैं। इसका कारण क्या है? जैसे कि कभी हम कोई लड़ाई हार जाते हैं तो आगे की लड़ाइयों में संशय और…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर, मेरा नाम अंकिता रावत है। सर, जैसे कि मन हमेशा चीज़ों की ओर आकर्षित होता है तो आकर्षित का मतलब होता है कि हमें वहाँ खुशी मिलेगी, हम उसके पीछे भागते हैं और वो और अन्त में हमें दुख ही होता है, मतलब खुशी और दुख का…