राम को किसी फ़िल्म, अभिनेता या ऐतिहासिक चरित्र की छवि तक सीमित करना उनके वास्तविक अर्थ को भूलना है। राम कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि अहंकार के विगलन और सत्य की ओर बढ़ने की दिशा हैं। बाहर पर्दे पर राम को खोजने के बजाय अपने भीतर उस तड़प को पहचानना ज़रूरी है, जो अहंकार से मुक्त होना चाहती है। जब राम विषय नहीं, हृदय बनते हैं, तभी रामत्व का वास्तविक अर्थ समझ में आता है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। तो जस्ट परसों ही एक मूवी का ट्रेलर लॉन्च हुआ है, रामायण करके, और वह अभी तक इंडियन सिनेमा की सबसे महँगी प्रोजेक्ट वाली मूवी है, जो कि ₹4000 करोड़ की लागत में बनी हुई है। इस मूवी में विशेषतः राजकुमार राम की कहानी बताई गई है, जो कि उनके जन्म से लेकर विवाह तक की स्टोरी है।
साथ में मैं एक चीज़ और देख रही थी इसमें, कि इसको यह बोलकर बहुत ज़्यादा ग्लैमराइज़ किया जा रहा है कि यह 30 तारीख़ को ब्रह्म मुहूर्त में रिलीज़ की गई है, सुबह 4:15 पर। और इसमें एक और चीज़ थी कि इसको धर्म और अधर्म, मतलब versus में बताया जा रहा है कि यह उसके ऊपर है। और एक और इंटरेस्टिंग चीज़ थी कि जो सीता माता का कैरेक्टर है, जो साईं पल्लवी प्ले कर रही हैं, तो यह बोला जा रहा है कि यह सीता माता का पावन किरदार है, जो वो प्ले कर रही हैं।
तो मैं इसी पर आपसे समझना चाहती हूँ। एक और चीज़ है कि यह दो पार्ट्स



