तीस साल मछली खाने के बाद वो वीगन बनीं, और घर हिल गया। पति कहते हैं, बेटी 18 की होकर ख़ुद तय करेगी, तब तक उसे खिलाओ। शांति के लिए वो हर बहस से हट जाती हैं, पर मन पूछता है: कहीं बेटी यह तो नहीं सीख रही कि ग़लत को चुप रहकर सहना चाहिए? जवाब सीधा है, “शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है।” और शादी से पहले? हम चेहरा देखते हैं, डिग्री और कमाई गिनते हैं, पर “उसका खोपड़ा झेलना पड़ेगा 24 घंटे”, यह कब देखते हैं?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
[एक संवाद से। एक प्रश्नकर्ता बताती हैं कि वीगन होने के बाद घर में बेटी के खाने को लेकर विवाद है और वे बहस से हट जाती हैं।]
प्रश्नकर्ता 1: मैं आपको डेढ़ साल से सुन रही हूँ। मैं आपसे फ़र्स्ट टाइम मिली हूँ और आपको फ़र्स्ट टाइम देख रही हूँ। थोड़ा सा डर है। थोड़ा सा नहीं भाई, ज़्यादा ही। तो हमारे यहाँ फ़िश एक स्टेपल फ़ूड है। 30 ईयर्स तक मैंने फ़िश ही खाई और अब जाकर मैं वीगन बनी हूँ। बात वीगन बनने की है नहीं। उसके बाद मेरी शादी हुई। मैं अभी मुंबई में रहती हूँ और मेरी एक सिक्स ईयर्स की डॉटर भी है। शादी के बाद चेंजेस हुए क्योंकि मैं वो सब बनाती थी और मैंने वो सब बनाना बंद कर दिया। घर में मैंने वो छूना बंद कर दिया या उसमें कंट्रीब्यूट करना बंद कर दिया तो पूरा घर हिल गया। मेरी डॉटर भी वो सब पहले से नहीं खाती थी, तो वो भी वीगन हो गई।
बात यहाँ तक अभी आ गई है कि मेरी वीगन लाइफ़




